फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

युवा किसान की अपहरण के बाद हत्या

विज्ञापन
विज्ञापन
परीक्षितगढ़/मेरठ। राजपुर गांव के अपहृत युवा किसान की हत्या कर दी गई। उसका शव किठौर क्षेत्र के सदुल्लापुर गांव के रजवाहे के पास मिला। युवक के चेहरे पर बेरहमी से वार किए गए थे। उसकी आंखें फोड़ने की भी कोशिश की गई। परिजनों ने गांव के ही चार लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करा दी है। हत्या की वजह पुरानी रंजिश बताई गई है।
विज्ञापन

पुलिस के अनुसार ग्राम राजपुर निवासी अश्वनी उर्फ बिन्नी (28) पुत्र बसंत त्यागी अविवाहित था और किसान था। तीन दिन पहले घर से बाइक लेकर निकला था। लेकिन लौटा नहीं था। परिजनों ने अपहरण का अंदेशा जताकर परीक्षितगढ़ थाने में उसकी गुमशुदगी के लिए प्रार्थनापत्र दिया था। बुधवार शाम अश्वनी की बाइक सदुल्लापुर रजवाहे के पास पड़ी मिली। परिजनों के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह खोजबीन के दौरान रजवाहे के पास अश्वनी का शव पड़ा था। किठौर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
चेहरा कुचला, गर्दन पर वार
परिजनों के अनुसार अश्वनी के चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ लग रहा था। लग रहा था कि पिटाई के दौरान धारदार हथियार से वार किए गए हो। उसकी आंखों के आसपास भी काफी सूजन थी। गर्दन पर भी कई निशान थे। शव की हालत देख लग रहा था कि हत्या को किसी प्रतिशोध के चलते अंजाम दिया गया।
विज्ञापन

दोस्त का साथ देने से खफा था दूसरा पक्ष
अश्वनी के पिता बसंत त्यागी के अनुसार 26 जून को गांव के अमरीश और विशाल के बीच झगड़ा हो गया था। विशाल के साथ अश्वनी की दोस्ती थी। इस वजह से वो विशाल के पक्ष में बोल पड़ा था। उसकी तरफदारी लेना ही अमरीश पक्ष को अखर गया और वो अश्वनी से रंजिश रखने लगे। पिता का आरोप है कि सात जुलाई को अमरीश ने अश्वनी को जान से मारने की धमकी दी थी और नौ जुलाई को अपहरण कर लिया गया। आरोप है कि अमरीश पक्ष ने रंजिश के चलते उसके बेटे की हत्या की है। पिता ने गांव के अमरीश, गिरीश (दोनो भाई) साहिल उर्फ रानू और सचिन को नामजद करते हुए हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
परिजनों में मचा कोहराम
अश्वनी की हत्या की खबर सुनते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शाम को अश्वनी का शव गांव में पहुंचा। गांव के शमशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
पुलिस की लापरवाही ने ली जान
परीक्षितगढ़। अश्वनी तीन दिन से लापता था। अपहरण के साथ अनहोनी का अंदेशा था। परिजन उसकी तलाश में जुटे थे। लेकिन पुलिस ने तहरीर मिलने के बावजूद उसकी गुमशुदगी तक दर्ज नहीं की। अश्वनी की मौत की पीछे पुलिस की भी लापरवाही रही। पुलिस समय से एक्शन ले लेती तो शायद उसकी जान बच जाती।
अश्वनी के पिता का कहना है कि उन्होंने थाना पुलिस को नौ जुलाई में ही उसके लापता होने की सूचना और गुमशुदगी की तहरीर दी थी लेकिन थाने के कार्यवाहक थानाध्यक्ष पवन मलिक ने परिजनों की ओर से गुमशुदगी की तहरीर मिलने से इंकार किया। इसी वजह से उसकी गुमशुदगी भी दर्ज नहीं हो सकी थी। परिजनों के अनुसार वे खुद ही उसे तलाश रहे थे। इस मामले की भी गंभीरता से जांच जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें