कंकरखेड़ा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नेशनल हाईवे के 18 मीटर की परिधि में स्थित सभी धार्मिक स्थलों को हटाया जा रहा है। इसी क्रम में एनएचएआई की टीम ने एनएच 58 स्थित बौद्ध विहार को ध्वस्त कर दिया। साथ ही वहां लगी डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा को भी हटा दिया।
सोमवार सुबह नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के प्रोटेक्टर हैड श्रीधर नारायण, ऑपरेशन मैनेजर पंकज कुमार सिंह एडीएम सिटी मुकेश चंद, एसपी सिटी रणविजय सिंह व एसडीएम अमिताभ यादव, सीओ दौराला पंकज कुमार सिंह, इंस्पेक्टर दीपक शर्मा कंकरखेड़ा, पल्लवपुरम, टीपीनगर सहित कई थानों की फोर्स व पीएसी के साथ हाईवे स्थित दायमपुर चौपले पर बने धार्मिक स्थल आंबेडकर ज्योति बौद्ध विहार एजुकेशनल ट्रस्ट पर पहुंचे। अधिकारियों ने धार्मिक स्थल के मुख्य महंत ज्ञान ज्योति भंते, भिक्षु प्रज्ञानंद व भिक्षु संघशील से ध्वस्तीकरण के संबंध में वार्ता की। इसके बाद महंतों ने धार्मिक स्थल में पूजा की। पूजा खत्म होने के बाद टीम ने बौद्ध विहार को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। इस दौरान लोगों में गुस्सा भी दिखाई दिया।
आंबेडकर की प्रतिमा हटाई
करीब दो घंटे की कार्रवाई के बाद अधिकारियों ने वहां पर लगी डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर मार्ल्यापण किया और उसे नीले कपड़े में लपेट कर जेसीबी से हटा दिया। प्रतिमा को हटाने में करीब 2.30 घंटे का समय लगा। अधिकारियों को डर था कि कहीं प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई तो मामला बिगड़ सकता है। एडीएम सिटी मुकेश चंद ने बताया कि शासन की ओर से बौद्ध विहार ट्रस्ट को 13 लाख 95 हजार 699 रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। बाबा साहेब की प्रतिमा को सुरक्षित प्रशासन ने अपनी सुरक्षा में रख लिया है। ट्रस्ट के महंत या गांव के दलित लोग जहां चाहेंगे, वहां पर प्रशासनिक अनुमति के बाद प्रतिमा को स्थापित कर दिया जाएगा। इसके अलावा जिन धार्मिक स्थलों को हाईवे पर चिह्नित किया गया है, उन्हें भी हटाया जाएगा।
भाजपा सरकार दलित विरोधी है
महंत ज्ञान ज्योति ने बताया कि 1990 में जब वीपी सिंह प्रधानमंत्री थे और राम विलास पासवान श्रम मंत्री थे तो उन्होंने अपने हाथों से बौद्ध विहार की नींव रखी थी। यहां पर बौद्ध धर्म की शिक्षा दीक्षा और डॉ. आंबेडकर की विचारधारा का प्रचार प्रसार किया जाता था। कभी सोचा नहीं था कि एक दिन इस तरह से बौद्ध विहार को ध्वस्त कर दिया जाएगा। विरोध या शिकायत भी करे तो किससे करें। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार है, जो दलित विरोधी है।
सभी धार्मिक स्थलों पर हो कार्रवाई
आंबेडकर समिति के पूर्व अध्यक्ष तेजपाल डाबका और महंत ज्ञान ज्योति ने कहा कि एनएचएआई द्वारा खड़ौली गांव के चौपले पर स्थित मस्जिद व बौद्ध विहार को ही हाईवे से हटाया गया है। जबकि हाईवे पर अन्य धार्मिक स्थल भी हैं, जिन्हें नहीं हटाया गया है। उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
मुआवजा नहीं चाहिए
बौद्ध विहार के महंतों ने कहा कि उन्हें शासन ने मुआवजा तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थल को स्थापित कराने के लिए जमीन नहीं दी। जबकि बौद्ध विहार के पीछे ही निगम की हजारों वर्ग मीटर जमीन खाली पड़ी है। उन्हें मुआवजा नहीं चाहिए बल्कि बौद्ध विहार को दोबारा स्थापित किया जाए। साथ ही बाबा साहेब की मूर्ति को दायमपुर गांव में दलितों की धर्मशाला में स्थापित किया जाए। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया।