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रिपोर्ट मांगते ही बालिग से नाबालिग हो गए आरोपी

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मेरठ। दो अप्रैल के बवाल में मेरठ पुलिस की लापरवाही सामने आई है। बवाली बताकर तीन नाबालिगों को पुलिस ने जेल भेज दिया। मामले की शिकायत एससीएसटी आयोग और एमनेस्टी (अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन) से की। इस मामले की रिपोर्ट शासन ने मांगी तो हरकत में आई पुलिस ने दो आरोपियों को नाबालिग बताकर बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया, जबकि तीसरा आरोपी अभी जेल में ही है।
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एससी-एसटी एक्ट में बदलाव की अफवाह फैलाकर दो अप्रैल को शहर में हुए बवाल में 150 लोगों को जेल भेजा गया था। जिसमें कई युवक बेगुनाह भी बताए गए। मेडिकल पुलिस ने भी तीन नाबालिग सहित 20 लोगों को जेल भेजा था। इन तीनों नाबालिगों के परिजनों ने एसएसपी और आला अधिकारियों से गुहार लगाई। लेकिन किसी ने एक नहीं सुनी। उसके बाद एससी-एसटी आयोग और एमनेस्टी में शिकायत की गई। एमनेस्टी की तरफ से शासन से इसकी जानकारी ली गई तो शासन ने मेरठ पुलिस से रिपोर्ट तलब कर ली।
एसएसपी ने भेजी शासन को रिपोर्ट
नाबालिगों को जेल भेजने का मामला दिल्ली तक गूंज गया। जिसके बाद एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने शासन को रिपोर्ट भेजी। जिसमें बताया गया कि नाबालिग होने के सुबूत परिजनों ने नहीं दिए। पुलिस के पास कोई भी साक्ष्य नहीं मिले, जिसके चलते उनको जेल भेजा गया था। बाद में दो नाबालिगों के परिजनों से सुबूत दिण् तो पुलिस ने उनको जेल से बाल संप्रेक्षण गृह में शिफ्ट कराया। तीसरे आरोपी के सुबूत अभी नहीं मिले हैं।
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बेगुनाह को जेल से छुड़ाएं
पुलिस अधिकारियों ने पूर्व में कहा था कि अगर दो अप्रैल के बवाल में कोई बेगुनाह जेल गया है तो पुलिस उसे जांच के बाद छुड़वाएगी। पुलिस ने पांच लोगों को जेल से छुड़वाया भी है। वहीं, लोगों का कहना है कि अभी कई बेगुनाह जेल में हैं। पुलिस उनको छुड़वाने को तैयार नहीं है। इसकी शिकायत भी एमनेस्टी से की गई है।
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खास बातें:
दो अप्रैल के उपद्रव में मेडिकल पुलिस ने तीन नाबालिग भेजे थे जेल
एससीएसटी आयोग और एमनेस्टी से शिकायत की पीड़ितों के परिजनों ने

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