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पवन गुप्ता को पवन बनाकर भेज दिया जेल

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मेरठ। दलित आंदोलन में पुलिस इस तरह बौखलाई कि उसने निर्दोष लोगों को भी जेल भेज दिया। अब ऐसे मामलों की परत खुल रही हैं। ये घटनाएं कंकरखेड़ा थाना में सबसे ज्यादा हुई। अब तक तीन मामले सामने आ चुके हैं।
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दो अप्रैल को दलित आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के बाद पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। इसमें कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में सबसे ज्यादा उग्र आंदोलन हुआ था। इसके बाद यहां से कई दर्जन युवकों को पुलिस ने बवालियों के नाम पर जेल भेजा था। उसी रात सरधना थाना क्षेत्र के खेड़ा गांव निवासी दो युवक भी जेल भेज दिए थे। ठाकुर बिरादरी के ये युवक परीक्षा देकर लौट रहे थे। जब इसका पता विधायक ठा. संगीत सोम को चला तो उन्होंने रात में ही डीएम और एसएसपी से बात कर कड़ी नाराजगी जतायी। जिस पर पुलिस ने रात में ही दोनों युवकों को जेल से बाहर निकाला और खेड़ा गांव छोड़कर आयी।
अब नए मामले में ब्रह्मपुरी निवासी पवन गुप्ता पुत्र अशोक गुप्ता कंकरखेड़ा बाईपास के पास स्थित एक फैक्ट्री में नौकरी करता है। दो अप्रैल को बवाल होने पर फैक्ट्री मालिक ने छुट्टी कर दी थी। जब पवन घर लौट रहा था तो पुलिस ने उसे भी पकड़कर जेल भेज दिया। अपना नाम पवन गुप्ता बताने पर भी पुलिस ने सिर्फ पवन दर्ज किया। इस मामले में पीड़ित परिवार ने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी से मुलाकात कर पूरी बात बतायी। जिस पर वाजपेयी ने इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा से वार्ता कर पवन को जेल से रिहा कराने को कहा। लेकिन इंस्पेक्टर ने उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया।
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शनिवार शाम डॉ. वाजपेयी ने डीएम और एसएसपी से इस मामले पर वार्ता कर सारे साक्ष्य दिखाए। जिस पर दोनों अधिकारी भी सकते में आ गए। इसके बाद दोनों अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि सोमवार को पवन को विधिक कार्रवाई कराते हुए जेल से रिहा करा दिया जाएगा।
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खास बातें:
- उपद्रव में पुलिस द्वारा निर्दोषों को जेल भेजने की खुल रही पोल
- डीएम, एसएसपी ने सोमवार तक पवन को जेल से बाहर कराने का दिया आश्वासन
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