परीक्षितगढ़। यह पुलिस प्रशासन की बेबसी हो या अवैध धंधेबाजों की दबंगई। बहरहाल महानगरों और शहरों की तर्ज पर कस्बे और देहात में भी सट्टा और शराब का अवैध कारोबार जोर पकड़ने लगा है।
परीक्षितगढ़ कस्बा और आसपास में ये तमाम धंधे खुलेआम चल रहे हैं। वहीं, पुलिस कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर इतिश्री कर रही हैै। पुलिस द्वारा की जा रही लचीली कार्रवाई से जहां धंधेबाजों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, खाकी का इकबाल भी खतरे में है। यही वजह है कि जनता का पुलिस से विश्वास उठने लगा है। सट्टा और शराब के अवैध धंधे के घुन ने नगर और देहात को भी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। धनाढ्य बनने का सपना पाले कुछ युवाओं ने क्षेत्र में इन अवैध धंधों का जाल फैला दिया है। वहीं, पुलिस जानबूझ कर अनजान बनी रहती है। इंतहा तो यह है कि अवैध-धंधों के अंजाम से वाकिफ कोई व्यक्ति यदि पुलिस को खबर देता है तो पुलिस खानापूर्ति करके जिम्मेदारी की इतिश्री कर लेती है। हाल ही में नगर के खजूरी दरवाजा में कई ऐसे मामले सामने आए हैं। जिनमें समाज हित के नजरिए से पुलिस को अवैध धंधों की सूचना दी गई और पुलिस ने कहीं राजनीतिक दबाव तो कहीं सेटिंग के जरिए कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर दी। परीक्षितगढ़ में गत दिनों रजवाहे के समीप एक बाग से पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जुआ खेलते हुए आधा दर्जन लोगों को पकड़ा था। हालांकि पुलिस ने उन्हें थाने से चेतावनी देकर जमानत पर छोड़ दिया। जिससे परीक्षितगढ़ के लोगों में पुलिस के प्रति रोष है।
मुख्य बातें
पुलिस कार्रवाई के नाम पर कर रही खानापूर्ति
पुलिस के रवैए से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद