मेरठ। प्रदेश में अपराध और कानून व्यवस्था को चुनौती मानते हुए पुलिस में बड़ा फेरबदल करने का फैसला लिया गया है। मेरठ में आठ थानों में चार-चार इंस्पेक्टरों की पोस्टिंग की जाएगी। प्रभारी निरीक्षक, अतिरिक्त प्रशासन निरीक्षक, अतिरिक्त कानून व्यवस्था निरीक्षक और अतिरिक्त अपराध निरीक्षक होंगे। यह आदेश डीजीपी ओपी सिंह ने सभी जनपद के कप्तानों को भेजा है। ईद के बाद यह व्यवस्था होगी।
यह फेरबदल पुलिस के आला अफसरों की मॉनिटरिंग के बाद सुनिश्चित हुआ है। बताया गया है कि एडीजी आशुतोष पांडेय ने इसकी समीक्षा की है। शुरुआत में सर्किल के थानों को लिया गया है। मेरठ जिले में कोतवाली, सिविल लाइन, ब्रह्मपुरी, सदर कैंट, मवाना, दौराला, सरधना और गंगानगर कोतवाली में चार-चार इंस्पेक्टर की नियुक्ति की जाएगी। इसको लेकर पुलिस के अधिकारियों ने आपत्ति भी जताई है। उन्होंने बताया कि 2016 में यूपी में 5000 इंस्पेक्टर का प्रमोशन इसी आधार पर किया था कि थानों में इंस्पेक्टर की तैनाती होगी।
यह होंगे निरीक्षकों के काम
प्रभारी निरीक्षक
थाने का भारसाधक अधिकारी, तीनों अतिरिक्त निरीक्षक व एसएसआई की मॉनीटिरिंग करना, गंभीर अपराधों में घटनास्थल का निरीक्षण, अपने अधीनस्थ विवेचकों की कार्यदक्षता की गोपनीय रिपोर्ट प्रेषित करना, जघन्य अपराध, नक्सल, आतंकवादियों की गतिविधियों के बारे में अभिसूचना संकलन करना आदि।
अतिरिक्त प्रशासन निरीक्षक
जीपी लिस्ट, मालखाने के प्रबंधन व जन सुनवाई में सहयोग, न्यायालय से संबंधित समन, नोटिस, सभी प्रार्थना पत्रों का निस्तारण, अपराधियों के जमानत के प्रार्थना पत्रों का विरोध हेतु यथा आवश्यक समयवद्ध कार्रवाई करना, गंभीर अपराध के विवेचना के दौरान आधुनिक और वैज्ञानिक उपकरण आधारित साक्ष्य को संकलित करना आदि।
अतिरिक्त कानून व्यवस्था निरीक्षक
थाना क्षेत्र से संबंधित कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी बीट पेट्रोलिंग, नाकाबंदी, दरोगा, सिपाही, होमगार्ड और अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित करना, अपराध के रोकथाम के लिए ड्यूटी निर्धारित, सुचारु ट्रैफिक व्यवस्था, एंटी रोमियो स्क्वायड, जुलूस, मेला और धार्मिक आयोजन पर शांति व्यवस्था स्थापित करना आदि।
अतिरिक्त अपराध निरीक्षक
अपराध से संबंधित सभी मामलों की जिम्मेदारी, अपराधों और यूपी 100 की मासिक स्टडी करना, भविष्य में प्रकृति अपराध पर नियंत्रण कर सके व चुनाव में होने वाले अपराध पर रोकथाम के लिए कार्य योजना बनाना, गंभीर अपराधों के घटनास्थल का निरीक्षण और पीड़ितों को सुरक्षा मुहैया करना, गैंगस्टर, रासुका की कार्रवाई कराना आदि।