- देहली गेट के नील की गली का मामला, दूसरे समुदाय के व्यक्ति पर आरोप
- व्यापारियों और हिंदू युवा वाहिनी ने थाना घेरा, युवा सेवा समिति भी थाने पहुंची
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। नील गली (सराफा बाजार) में रविवार को दूसरे समुदाय के 50 वर्षीय व्यक्ति द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के आरोप को लेकर बखेड़ा हो गया। मामला इतना तूल पकड़ा कि देर रात तक थाना देहली गेट पर हंगामा होता रहा। व्यापारियों और हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की। वहीं, दूसरे समुदाय के लोगों के साथ थाने पहुंचे युवा सेवा समिति के पदाधिकारियों ने इसे साजिश बताकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
एसओ देहली गेट रविंद्र सिंह पलावत के अनुसार नील गली में दूसरे समुदाय के एक व्यक्ति की चाय की दुकान है। नील गली के सराफा कारीगर मोनू का चाय की दुकान पर आना-जाना है। मोनू ने रविवार को आरोप लगाया कि इस दुकानदार ने जम्मू कश्मीर में हुए आतंकी हमले का नाम लेकर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। सूचना पर देहली गेट पुलिस मौके पर पहुंच गई और नारे लगाने के आरोप में दुकानदार को पूछताछ के लिए थाने ले गई। हालांकि पूछताछ के दौरान कोई वीडियो या ऑडियो नहीं मिला। साक्ष्य के अभाव में पुलिस ने दुकानदार को छोड़ दिया।
इस बीच हिंदू युवा वाहिनी के सचिन मित्तल, हेमंत कुमार, अनूप रस्तौगी, पुनीत वर्मा, विशाल और रक्षत आदि कार्यकर्ताओं ने थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा कर दिया। जिस पर एसओ देहली गेट आरोपी दुकानदार को फिर से थाने ले आए। जिस पर हिंदू वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग शुरू कर दी। पुलिस ने जब सुबूत मांगा तो कोई दिखा नहीं सका।
वहीं, युवा सेवा समिति के अध्यक्ष बदर अली भी देर रात पदाधिकारियों और मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ थाने पहुंच गए। आरोप लगाया कि दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। नारेबाजी का गलत आरोप लगाकर साजिश रची जा रही है। यदि पुलिस या किसी के पास पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने का ऑडियो या वीडियो है तो पुलिस को देशद्रोह की धारा में कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन निर्दोष को नहीं फंसाना जाना चाहिए। जिसके बाद पुलिस ने दुकानदार को छोड़ दिया। एसओ देहली गेट ने बताया कि बिना किसी साक्ष्य के किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता इसलिए उच्चाधिकारियों के संज्ञान में मामला लाकर दुकानदार को छोड़ दिया गया।
नारेबाजी का साक्ष्य नहीं
चाय की दुकान चलाने व्यक्ति और सराफा कारीगर में मारपीट हुई थी। दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते हैं। पाकिस्तान के नारे लगाने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। पूछताछ के बाद दुकानदार को छोड़ दिया गया है। -रणविजय सिंह, एसपी सिटी