यूबीआई के मैनेजर और डिप्टी मैनेजर हिरासत में
मेरठ। पांच लाख रुपये के चेक के मामले में धोखाधड़ी के आरोप में घिरे यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) मुख्य शाखा मेरठ के मैनेजर और डिप्टी मैनेजर के खिलाफ कमिश्नर के आदेश पर सदर थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। उच्चाधिकारियों ने बैंक के इन अधिकारियों को दिन में बुलाया था। लेकिन गिरफ्तारी के डर से नहीं पहुंचे। रात को सदर बाजार पुलिस दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर सुपुर्दगी में दे दिया।
दर्ज शिकायत में आरोप लगाते बताया गया कि नेहरू नगर निवासी प्रदीप कुमार का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया मुख्य शाखा में खाता है। चार सितंबर 2017 को प्रदीप कुमार ने पांच लाख रुपये का ‘योर सेल्फ’ का चेक वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के तहत खाता खोलने हेतु बैंक में प्रक्रिया के तहत जमा किया था। लेकिन न तो खाता खोला गया और न पास बुक दी गई। आरोप है कि चेक पर पेय के कॉलम में साजिश के तहत ‘योर सेल्फ’ की जगह कादिर सतफाक बनाकर किसी अन्य को इसका भुगतान कर दिया गया।
डीएम और एसएसपी से इसकी शिकायत की गई। लेकिन केस दर्ज नहीं होने पर 15 फरवरी 2018 को प्रदीप कुमार ने इसकी शिकायत कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार से की थी। जिसके बाद कमिश्नर ने पांच मार्च को वरिष्ठ शोध अधिकारी (संस्थागत वित्त) को जांच के आदेश दिए। जिस बैंक कर्मी को पांच लाख का चेक दिया था। उस समय बैंक के सहायक महाप्रबंधक पीएन चौधरी थे। भुगतान पास करने हेतु वरिष्ठ बैंक अधिकारी सतेंद्र राव के पास भेजा गया। जिसके बाद किसी अन्य को साजिश के तहत भुगतान किया गया।
कमिश्नर ने दिन में बैंक शाखा के अधिकारियों को बुलाया था। लेकिन उन्हें गिरफ्तारी का डर था, जिसके चलते वह नहीं गए। कमिश्नर के आदेश पर सदर बाजार थाने में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश और जाली दस्तावेज की धारा में रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने मैनेजर प्रकाश नारायण चौधरी और डिप्टी मैनेजर सत्येंद्र राव को रात में हिरासत में ले लिया।
एसपी सिटी मान सिंह चौहान का कहना है कि धोखाधड़ी के केस में पुलिस पूरे साक्ष्य जुटाने के बाद कार्रवाई करती है। बैंक के दोनों अधिकारियों से पूछताछ की जा रही है। वहीं, एएसपी कैंट सतपाल सिंह ने देर रात बताया कि दोनों अधिकारियों को सुपुर्दगी में छोड़ दिया गया है। जांच के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।
खास बातें:
कमिश्नर के आदेश पर सदर बाजार थाने में दर्ज हुआ धोखाधड़ी का केस