पूर्व सांसद का कश्मीरी गनर जेल भेजा
मेरठ। पूर्व सांसद के कश्मीरी गनर आजिम को बृहस्पतिवार को कोतवाली पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार आजिम को वर्ष 2013 में ही जानकारी हो चुकी थी कि उनका लाइसेंस फर्जी है। इसके बावजूद वह सेटिंग करके फर्जी लाइसेंस को रिन्यूअल कराकर सिक्योरिटी कंपनी के जरिये नौकरी कर रहा था।
सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ल के मुताबिक विगत मंगलवार रात एसएसपी मंजिल सैनी ने चेकिंग के दौरान पूर्व सांसद के दो गनरों को पकड़ा था। दोनों की लाइसेंसों की सीओ ट्रैफिक संजीव देशवाल को जम्मू भेज कर जांच कराई। जिसमें गनर आजिम का शस्त्र लाइसेंस फर्जी मिला। बुधवार रात को आजिम के खिलाफ कोतवाली थाने मेें धोखाधड़ी और आर्म्स एक्ट की धारा में केस दर्ज हुआ।
कंपनी को नोटिस भेजा
पुलिस ने बताया कि पूर्व सांसद का यह गनर आजिम दिल्ली की एक सिक्योरिटी कंपनी के जरिये पांच मार्च 2018 को मेरठ आया था। सिक्योरिटी कंपनी ने बिना जांच पड़ताल किए पूर्व सांसद की सुरक्षा में गनर कैसे भेज दिया, इस संबंध में पुलिस ने कंपनी को नोटिस भेजा है। यह सुरक्षा में भारी चूक भी है।
चर्चा कि बवाल में थे गनर
लोगों में चर्चा है कि वर्ष 2014 में तीरगरान बवाल में गनरों को लेकर सवाल उठे थे। अब इसकी भी जांच होनी चाहिए। सोशल साइट पर इसे वायरल किया जा रहा है। हालांकि पुलिस का दावा कि यह महज अफवाह है। बवाल से गनरों का अभी तक कोई लेना-देना सामने नहीं आया।
हमारे बेटे भी है, जांच कर लो
ट्रैफिक सीओ संजीव देशवाल ने बताया कि जब वह जम्मू में कश्मीरी गनर आजिम की जांच कराने पहुंचे तो वहां एक दर्जन से अधिक लोग पहुंचे। लोगों ने कहा कि पूर्व सांसद के यहां पर उनके बेटे भी सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते है। उनके पास शस्त्र लाइसेंस हैं, आप चाहो तो उनकी भी जांच करा लो। जिस पर सीओ बोले कि ऐसा कुछ नहीं है। एक ही संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस मिला था, अन्य सब ठीक हैं।
यह मिली खामियां
सीओ ट्रैफिक ने बताया कि वर्ष 2008 में जम्मू में तत्कालीन एडीएम मुख्तार अहमद ने बगैर कागजों के लाइसेंस बनाए थे। जिसमें कई बेरोजगार युवकों ने गार्ड की नौकरी पाने के लिए शस्त्र लाइसेंस बनाए थे। इसी दौरान ही आजिम का लाइसेंस बना था। एक बार उसी अधिकारी ने उसे रिन्यूअल भी कर दिया। जांच के बाद एडीएम को जेल जाना पड़ा। उसके बाद आजिम का लाइसेंस फर्जी साबित हो गया था। सरकारी रजिस्टर में इस लाइसेंस की कोई एंट्री नहीं मिली। साल 2013 के बाद आजिम लगातार उसे फर्जी तरीके से रिन्यूअल करा रहा था।
खास बातें:
शस्त्र लाइसेंस निकला था फर्जी, जांच भी बैठी
सिक्योरिटी कंपनी को भी पुलिस ने भेजा नोटिस