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थमी रहीं सांसे, टकटकी लगाकर देखते रहे लोग

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मेरठ। मेडिकल कॉलेज में शनिवार देर रात तक सहारनपुर से मरीजों के आने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान उनके तीमारदार भी मौजूद रहे। बढ़ती भीड़ को देखकर चिकित्सकों ने इमरजेंसी में तीमारदारों की एंट्री पर रोक लगाई तो वह बाहर ही बैठ गये। अपने मरीज का हाल जानने के लिए उनकी सांसें थमी रहीं और वह टकटकी लगाकर दूर से ही उन्हें देखते रहे। हर कोई बीती रात के परिणामों से भयभीत दिखाई दिया। मरीज का हाल जानने की उत्सुकता उनके भीतर साफ दिख रही थी।
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अन्य मरीजों को भेजा आगे
मेडिकल कॉलेज में सहारनपुर के मरीजों का दबाव बढ़ता देख चिकित्सकों ने अन्य मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया। शामली से आए शहजाद ने बताया कि उनके मरीज को मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन बेड कम होने की बात कहकर उन्हें गाजियाबाद रेफर कर दिया गया। ऐसा ही अन्य तीमारदारों ने भी कहा।
मास्क का रहा टोटा
जिस इमरजेंसी में सहारनपुर शराब कांड के पीड़ित पहुंच रहे थे, उसी के एक हिस्से में स्वाइन फ्लू के भी कुछ मरीज भर्ती थे। इनको लेकर लोगों में खासी दहशत दिखी। एहतियात के तौर पर लोगों ने अस्पताल कर्मचारियों से मास्क की मांग की। लेकिन वह भी उन्हें नहीं मिले। इस बीच वहां पहुंचे प्रभारी प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग, डॉ. सुभाष सिंह और डॉ. दिनेश राणा ने यह शिकायत मिलने पर मास्क मंगाकर तीमारदारों को दिए।
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वरिष्ठ चिकित्सकों की खली कमी
मेडिकल कॉलेज में वरिष्ठ चिकित्सकों की कमी भी शनिवार को काफी खली। इमरजेंसी की पूरी व्यवस्था जूनियर डाक्टर संभाले हुए थे। ऐसे में मरीज के तीमारदारों के गुस्से का भी इन डाक्टरों ने बेहद शांतिपूर्ण ढंग से सामना किया। हर 10 मिनट के बाद कोई न कोई तीमारदार इन डाक्टरों को अनेक सवालों के साथ घेरे हुए था। बमुश्किल उन्होंने इन तीमारदारों को समझाते हुए उपचार आगे बढ़ाया। कई बार हंगामे की स्थिति बनी, जिसे इन जूनियर डाक्टरों ने बखूबी संभालते हुए शांत कराया।
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