मेरठ। एसटीएफ ने पकड़े गए कविराज से एमबीबीएस की दो कॉपियों को कब्जे में लिया है। एफआईआर में इन दोनों कॉपियों के अनुक्रमांक और क्रमांक को शामिल किया गया है। सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह के अनुसार कब्जे में ली गईं कॉपियों वाले छात्र स्वर्णजीत और आयुष बताए गए हैं। मुजफ्फरनगर कॉलेज की ये कॉपियां बताई गई हैं।
सीओ ने बताया कि एसटीएफ इंस्पेक्टर धर्मेंद्र यादव ने मेडिकल थाने में जो मुकदमा दर्ज कराया है उसमें एक कॉपी में एमबीबीएस लिखा गया है। पहली कॉपी पर क्रमांक 2865893 तथा रोल नंबर 6056142 एमबी-07 व कोड 205 है जबकि दूसरी कॉपी पर क्रमांक 3394463 तथा रोल नंबर 6058035 एमबी-07 कोड 205 है। मुजफ्फरनगर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के जिन दो छात्रों की कॉपियां एसटीएफ ने बरामद की है, उन्हें भी मुलजिम बनाया जाएगा। इन छात्रों से पूछताछ के बाद यह भी जानकारी जुटाई जाएगी कि दूसरे और किन-किन एमबीबीएस छात्रों ने अपनी कॉपियां बदलवाई। एसटीएफ सूत्रों को ज्ञात हुआ है कि इस पूरे गड़बड़झाले में मेडिकल कॉलेज के कुछ डॉक्टर भी शामिल है।
माना जा रहा है कि एमबीबीएस का जो पर्चा लीक हुआ, उसमें भी इन डॉक्टरों की अहम भूमिका रही। जिस स्टूडेंट लीडर के पर्चा बेचने की बात सामने आई थी, वह तो इस कड़ी में बहुत निचले पायदान पर है। असल में इसके पीछे कुछ डॉक्टरों के नाम सामने आ रहे हैं। डॉक्टर द्वारा कॉपियां बदलवाने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में एसटीएफ डॉक्टरों के बारे में पूरी जानकारी खंगाल रही है। सोमवार को एसटीएफ की टीम मुजफ्फरनगर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की उस छात्रा से भी पूछताछ करेगी जिसके पिता द्वारा कई बार कॉपियां बदलवाई गई थी।
चंद्रप्रकाश बताएगा कि रैकेट में कौन-कौन
विश्वविद्यालय के आंसर बुक सेंटर पर तैनात रहा रिटायर्ड कर्मचारी चंद्रप्रकाश का नाम भी एसटीएफ ने मुकदमे में दर्ज कराया है। इसके बारे में पवन ने जानकारी दी थी कि चंद प्रकाश भी पूरे प्रकरण में लिप्त है। हालांकि पवन को कुछ दिन पहले चंद्रप्रकाश की शिकायत पर ही आंसर सेक्शन बुक सेंटर से हटाया गया था। ऐसे में अंदेशा यह भी है कि कहीं पवन ने चंद्र प्रकाश को फंसाने के लिए तो उसका नाम नहीं ले दिया। इसकी जानकारी चंद्रप्रकाश के पकड़े जाने के बाद ही साफ हो पाएगी।