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किराए के मकान में बनती थीं लूट की योजनाएं

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कंकरखेड़ा। अपहृत पीयूष का चौथे दिन भी सुराग नहीं लगा। लेकिन खुलासे चौंकाने वाले हो रहे हैं। पुलिस के अनुसार पीयूष और उसके अपहरण में नामजद दोस्त आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। जांच में सामने आया है कि जिस किराए के मकान में सभी दोस्त रहते थे, वहां लूट और अन्य आपराधिक वारदातों की योजनाएं बनती थीं। हथियारों की खरीद-फरोख्त भी होती थी।
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पुलिस के अनुसार गांव दबथुवा सरधना निवासी पीयूष चौधरी पुत्र सेंसरपाल कंकरखेड़ा के जिटौली गांव में रीना मलिक के किराए के मकान में रहता था। चार दिन पूर्व वह संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया था। पुलिस को मकान के पास खून के अलावा उसके खून में सने कपड़े व चप्पल पड़ी मिली थी। पीयूष के परिजनों की तहरीर पर पीयूष के दोस्त सचिन चौधरी, अजय, मोनू व रोहित के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार पीयूष शादीशुदा है और बच्चों को लेकर देहरादून में रह रहा था। वहीं मकान सचिन चौधरी ने किराए पर लिया था। लेकिन वह भी वहां पर नहीं रहता था। सचिन, मोनू, अजय, रोहित व पीयूष सभी अपराधी प्रवृति के हैं। सभी के खिलाफ लूट, डकैती व हत्या के केस दर्ज हैं। सभी का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पीयूष वहां पर डेरी खोलना चाहता था, जबकि पता चला कि उसके पास कोई भैंस ही नहीं है। दो भैंस जो मौके पर मिलीं वह भी मकान मालिक की निकली। पुलिस का कहना है कि किराए का मकान सिर्फ मौज मस्ती, लूट की योजनाएं बनाने व हथियारों की सप्लाई करने के लिए लिया गया था।
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इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा पीपी सिंह का कहना है कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए दबिश दी जा रही हैं। लेकिन अभी कोई हत्थे नहीं चढ़ा है। वहीं, जांच में अब तक आसपास के लोगों से पता चला है कि किराए के मकान में मौज मस्ती के अलावा ये आरोपी लूट की योजनाएं बनाते थे और हथियारों की सप्लाई करते थे। हैरत इस बात की है कि पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
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- नहीं लगा अपहृत पीयूष का सुराग, चौंकाने वाले हो रहे खुलासे
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