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Meerut News: चेतावनी टंगी रही, सिस्टम सोता रहा, चली गईं तीन जानें

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महमूदपुर में मृतक इस्तकार के घर पर विलाप करती महिलाएं। संवाद
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सहारनपुर। काली नदी पर हुए हादसे के लिए केवल तेज रफ्तार डंपर चालक नहीं, बल्कि व्यवस्था भी जिम्मेदार है। पुल का कार्य प्रगति पर है कृप्या धीरे चलें...शीर्षक से एक बैनर टांग दिया गया, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा के लिए जमीनी स्तर पर कोई ठोस इंतजाम नहीं किया। इस बैनर को संकेतक कहें या फिर चेतावनी, वह तो हादसे के बाद भी टंगा रहा, लेकिन तीन जानें हमेशा के लिए इस दुनिया से चली गईं। बड़ा सवाल यह है कि हादसे का पूरा ठीकरा डंपर चालक पर फोड़ दिया जाएगा या फिर संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार होंगे, जिन्होंने एक नहीं, बल्कि कई बिंदुओं पर लापरवाही बरती।
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लापरवाही नंबर एक : इसके लिए अधिकारी जिम्मेदार

डंपर चालक ने जो किया वह किया, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही भी कुछ कम नहीं है। सिड़की-झबरेड़ा मार्ग स्थित काली नदी के निर्माणाधीन पुल के पास हुए हादसे ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। निर्माण स्थल पर न तो टूटे पुल तक जाने वाले रास्ते पर पर्याप्त बैरिकेडिंग की गई थी और न ही लाइट लगाई गई थे। मात्र एक बैनर पर रास्ता इधर से है, लिखकर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया गया। ग्रामीणों के अनुसार रात के समय यहां अंधेरा रहता है, जिससे बाहरी वाहन चालकों को रास्ता समझने में परेशानी होती है। यदि वाहनों के लिए बनाई वैकल्पिक रोड को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया होता और पुल की ओर जाने वाले रास्ते को बंद किया गया होता तो शायद हादसा न होता।



लापरवाही नंबर दो : डंपर चालक जिम्मेदार

जिस तरीके से यह हादसा हुआ, उससे देखकर लग रहा है कि डंपर की स्पीड काफी ज्यादा थी। चालक नींद में था या फिर नशे में, यह तो जांच का विषय है क्योंकि चालक निर्माणाधीन पुल पर चढ़ने के बाद समय रहते डंपर के ब्रेक नहीं लगा सका और हादसा हो गया। हादसे के बाद चालक मजदूरों की मदद करने की बजाय डंपर छोड़कर मौके से भाग गया। हालांकि पुलिस का कहना है कि चालक की तलाश की जा रही है और जल्दी ही उसे पकड़ लिया जाएगा।
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लापरवाही नंबर तीन : इसके लिए पुलिस-प्रशासन जिम्मेदार

रात के समय खनिज से भरे डंपर अक्सर ओवरलोड रहते हैं, जो पहले भी कई बार हादसे का कारण बन चुके हैं। पिछले साल नवंबर माह में भी गागलहेड़ी में बजरी से भरा डंपर कार पर पलट गया था, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई थी। सवाल यह है कि आए दिन खनिज से भरे डंपर मौत का कारण बन रहे हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों का रवैया जस का तस है। गागलहेड़ी में हुआ हादसा हो या फिर काली नदी पर हुआ हादसा, इन दोनों मामलों में बजरी से भरा डंपर मौत का कारण बना, लेकिन हैरानी की बात यह है कि दोनों ही हादसों का पता चलते ही पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों ने सबसे पहले यही सफाई दी कि डंपर के कागज ठीक हैं। खैर हर बार की तरह इस बार भी वही होगा, चंद दिनों की सख्ती और फिर ढाक के तीन पात।
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