शवों का अंतिम संस्कार बना व्यापार, सालाना कमाई 75 लाख रुपये
मेरठ। शहर में गंगा मोटर कमेटी की सरपरस्ती में संचालित सूरजकुंड श्मशान स्थल में शवों का अंतिम संस्कार एक कारोबार बन चुका है। दक्षिणा के नाम पर आचार्यों की सालाना कमाई 75 लाख रुपये से भी अधिक है। इस बात की पुष्टि स्वयं कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा की गई है। श्मशान में 42 आचार्यों का ग्रुप है, जो अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यों को संचालित करता है। वास्तविकता यह है कि इस गोरखधंधे पर अंकुश लगाने में कमेटी के पदाधिकारी भी खुद को असहाय बता रहे हैं।
शवदाह गृह सूरजकुंड पर 42 आचार्यों का ही सिक्का चलता है। श्मशान में शव आते ही पूरा पैकेज मृतक के परिजनों को बता दिया जाता है। एक आचार्य अपना एक दिन को दूसरे को देने के लिए 2.5 लाख रुपये तक की सालाना पगड़ी लेता है। इसके बाद वह दिन दूसरे के हिस्से में आ जाता है। कुछ आचार्य घंटों के हिसाब से भी समय देते हैं और दक्षिणा का आधा हिस्सा उनके खाते में जाता है।
सूरजकुंड श्मशान में कमेटी के आंकड़ों के अनुसार रोज औसतन 11 शव आते हैं। हालांकि सर्दियों में शवों की संख्या प्रतिदिन 50 से 70 तक पहुंच जाती है। क्रिया के बाद फूल चुगने सहित अन्य कार्यों के लिए अलग शुल्क होता है। अगर पैकेज पर गौर करें तो प्रति व्यक्ति आठ से 10 हजार रुपये तक की राशि वसूली जाती है। ऐसे में लाखों के इस खेल में किसी बाहरी व्यक्ति को सूरजकुंड में आने अनुमति नहीं है। यहां कार्य करने वाले आचार्य स्वयं को राजा हरीशचंद्र के वंशज बताते हैं और क्रिया को अपनी पैतृक संपत्ति। इनकी कमाई का रिकार्ड न जिला प्रशासन के पास है और न ही गंगा मोटर कमेटी को दिया जाता है।
नहीं हुआ पर्ची सिस्टम लागू
जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी की शिकायत पर जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लिया। एसीएम और उप नगर आयुक्त ने बृहस्पतिवार को श्मशान का निरीक्षण करने के बाद आचार्यों को चेतावनी दी थी। दूसरे दिन भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। अंतिम संस्कार कराकर जाने वाले किसी भी व्यक्ति को आचार्यों द्वारा रसीद नहीं दी गई। उधर, नगर निगम की संपत्ति में चल रही लकड़ी की टाल के संबंध में भी अधिकारिक तौर में दूसरे दिन भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
जिला प्रशासन का हस्तक्षेप जरूरी
गंगा मोटर कमेटी के मंत्री दिनेश चंद्र जैन ने कहा कि अंतिम संस्कार में दक्षिणा के खेल को व्यवस्थित करने के लिए जिला प्रशासन को स्वयं सक्रिय होकर कार्य करना होगा। यहां रसीद सिस्टम लागू किया जाना अब जरूरी हो गया है। शिकायत होती है। जांच चलती है और फिर अधिकारी बदल जाते हैं। आचार्य पर्ची सिस्टम के पक्ष में नहीं होंगे क्योंकि तब दक्षिणा का हिसाब खुलकर सामने आ जाएगा। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को नगर आयुक्त से फोन पर अवगत कराया गया है। संपूर्ण जानकारी देने के लिए उनसे समय मांगा गया है। गैस आधारित शवदाह गृह की भी मांग की गई है।