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Meerut News: विधानसभा उपचुनाव में दांव पर भाजपा के मंत्रियों की साख

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मेरठ। नौ विधानसभा सीटों के उपचुनाव योगी सरकार के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गए हैं। पश्चिम क्षेत्र की तीन सीटाें पर भी उपचुनाव होना है। योगी सरकार ने प्रत्येक विधानसभा में तीन मंत्रियों की तैनाती की है। ऐसे में इन मंत्रियों की साख भी दांव पर लगी है। मंत्रियों की तैनाती में भी सियासी समीकरणों को ध्यान में रखा गया है। मीरापुर में रालोद तो गाजियाबाद और कुंदरकी में भाजपा प्रत्याशियों का चुनाव लड़ना तय है।
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पश्चिम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली मुजफ्फरनगर की मीरापुर, गाजियाबाद शहर सीट और संभल जनपद की कुंदरकी सीट पर 13 नवंबर को उपचुनाव होगा। योगी सरकार ने इन चुनावों को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। इसलिए बहुत पहले से ही प्रत्येक विधानसभा में सरकार के तीन मंत्रियों की ड्यूटी लगाई है। इसमें भी सियासी समीकरणों को ध्यान में रखा गया है। मीरापुर सीट पर मुस्लिमों के बाद दलित, जाट और गुर्जर वोटरों का बाहुल्य है।
इसलिए यहां पर रालोद कोटे से कैबिनेट मंत्री व पुरकाजी सुरक्षित सीट से विधायक अनिल कुमार, ऊर्जा राज्यमंत्री और गुर्जर नेता डॉ. सोमेंद्र तोमर और राज्यमंत्री व जाट नेता केपी मलिक को तैनात किया गया है। इसी तरह से गाजियाबाद शहर सीट पर वैश्य, ब्राहमण वोटर अच्छे-खासे हैं। इसलिए यहां पर कैबिनेट मंत्री व ब्राह्मण नेता सुनील शर्मा, राज्यमंत्री व वैश्य वर्ग के नेता कपिल देव अग्रवाल के साथ ही क्षत्रियों की नाराजगी को देखते हुए राज्यमंत्री व क्षत्रिय वर्ग के नेता कुंवर बृजेश सिंह को जिम्मेदारी दी गई है।
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कुंदरकी सीट पर भी सियासी समीकरणों को ध्यान में रखकर भाजपा ने कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह, जेपीएस राठौर और राज्यमंत्री जसवंत सैनी को जिम्मेदारी दी है। इस कारण इन मंत्रियों की साख भी उपचुनाव में दांव पर लगी है।
एक पर रालोद तो दो पर भाजपा लड़ेगी चुनाव
उपचुनाव में भाजपा-रालोद का गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा। मीरापुर सीट रालोद के कोटे में चली गई है। इसी तरह से कुंदरकी और गाजियाबाद शहर सीट पर भाजपा प्रत्याशी चुनाव लड़ेेंगे। मीरापुर में भाजपा-रालोद गठबंधन गुर्जर, जाट और भाजपा के कैडर वोटर के सहारे चुनाव लड़ेगा। गाजियाबाद में भाजपा अपने बूते पर ही चुनाव लड़ेगी। जबकि कुंदरकी में भाजपा मजबूत और जिताऊ उम्मीदवार की तलाश में है।
कुंदरकी में केवल एक बार जीती भाजपा
यहां पर भाजपा हार का सूखा खत्म करने की कवायद में जुटी है। संभल जनपद की कुंदरकी सीट पर भाजपा केवल 1993 में चुनाव जीत पाई है। उस समय चंद्रविजय सिंह ने भाजपा का कमल कुंदरकी में खिलाया था। इसके बाद से भाजपा उम्मीदवार यहां पर जीत हासिल नहीं कर पाए हैं। 2017 में यहां से सपा के मोहम्मद रिजवान ने भाजपा के रामवीर सिंह को हराया। सपा को 110561 वोट मिले तो भाजपा को 99740 वोट मिल पाए। 2022 में सपा के जियाउर्रहमान बर्क (125000 वोट) ने भाजपा के कमल प्रजापति (80 हजार वोट) को हराकर चुनाव जीता।
गाजियाबाद में भाजपा लंबे समय से काबिज
गाजियाबाद शहर सीट पर भाजपा लंबे समय से काबिज है। भाजपा के बालेश्वर त्यागी 1991, 1993 और 1996 में यहां से विधायक चुने गए। इसके बाद 2002 में उन्हें कांग्रेस के सुरेंद्र प्रकाश गोयल ने हरा दिया। 2007 में फिर भाजपा के सुनील शर्मा विधायक बने। 2012 में बसपा के सुरेश बंसल चुनाव जीते। 2017 और 2022 में भाजपा के अतुल गर्ग ने भारी मतों से चुनाव जीता। अतुल गर्ग के सांसद बनने के कारण यहां उपचुनाव हो रहा है।
मीरापुर में बसपा, रालोद और भाजपा को मिली जीत
परिसीमन के बाद मोरना के स्थान पर गठित मीरापुर सीट पर 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। उस समय बसपा के जमील अहमद कासपी ने रालोद की मिथलेश पाल को हराकर विधायक बने। भाजपा उम्मीदवार वीरपाल निर्वाल तीसरे स्थान पर रहे। 2017 में भाजपा के अवतार सिंह भड़ाना ने सपा के लियाकत अली को 193 वोट से हराया। बसपा के नवाजिश आलम तीसरे स्थान पर रहे। 2022 के चुनाव में रालोद के चंदन चौहान ने भाजपा के प्रशांत चौधरी को 27380 वोटों से हराया। बसपा के मोहम्मद सलीम तीसरे स्थान पर रहे।
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