मेरठ में जिला कारागार में बंदी द्वारा आत्महत्या किए जाने के बाद हड़कंप मचा है। आत्महत्या के कारणों को जानने की कोशिश की जा रही है। इस बीच जेल प्रशासन ने भीतर की निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ अब बंदियों की काउंसिलिंग का दायरा भी बढ़ाने का निर्णय लिया है। तीन स्तर पर बंदियों की काउंसिलिंग होगी। खुद अफसर इसकी निगरानी करेंगे।
चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में करीब 2500 बंदी मौजूद हैं। 150 महिला बंदियों के अलावा यहां सजायाफ्ता बंदियों की संख्या करीब 450 है। जेल के भीतर के माहौल को बेहतर बनाये रखने के लिए जेल प्रशासन समय-समय पर यहां तरह-तरह के आयोजन करता है।
इनमें खेल व आध्यात्मिक गतिविधि भी शामिल हैं। मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखने के लिए बंदियों की काउंसिलिंग भी कराई जाती है। लेकिन कोरोना काल में यह गतिविधियां काफी हद तक प्रभावित हुई है। इससे जेल के भीतर के माहौल में बदलाव भी दर्ज किया गया है।
गंभीर बंदियों की बढ़ेगी निगरानी
गंभीर व शांत रहने वाले बंदियों की निगरानी बढ़ाने के लिए कुछ सजायाफ्ता बंदियों को तैयार किया गया है। यह बंदी गंभीर मुद्रा वाले बंदियों के बीच रहकर उनकी मनोदशा को समझते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। कोशिश यही होगी कि बंदी को डिप्रेशन में जाने से बचाया जाए।
बंदियों की समय-समय पर काउंसिलिंग कराई जाती है। इसका दायरा बढ़ाया जा रहा है। कोशिश यही की जा रही है कि माहौल में बदलाव आए। जहां तक दुश्वारियों की बात है तो कोरोना काल में हर कोई दुश्वारी झेलने को मजबूर है।
- डॉ. बीडी पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक, जिला कारागार