मेरठ। गृहकर बिलों में बेतहाशा वृद्धि और भ्रष्टाचार के आरोपों ने शहर के भवन स्वामियों को परेशान कर दिया है। 200 रुपये के बिल को 22 हजार, 11 हजार का बिल 1.10 लाख में बदलने से लाखों लोग असमंजस में हैं। भाजपा और कांग्रेस के पार्षदों ने अपने-अपने वार्डों में भवन स्वामियों को साफ हिदायत दी है कि इस भ्रष्टाचार से घिरे बिलों को जमा न करें।
भाजपा पार्षद अनुज वशिष्ठ ने बताया कि उनके वार्ड में गृहकर बिल के साथ स्वकर निर्धारण प्रपत्र वितरित नहीं किए गए। पहले संशोधन कर बिल सही किए जाएँ, उसके बाद ही बिल बांटे जाएँ। उन्होंने कहा कि निगम के कर्मचारी बिल बढ़ाकर बाद में रिश्वत लेकर कम करने की बात कहते हैं। इसके खिलाफ शिकायत मुख्य कर निर्धारण अधिकारी और अन्य अधिकारियों से की जा चुकी है। कांग्रेस पार्षद सारिका के पति और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रंजन शर्मा ने कहा कि 100 रुपये देने वाले भवन स्वामी से 20 हजार रुपये की मांग करना बिलकुल अनुचित है। बिल सीधे 100 गुना बढ़ा दिया गया है, जो जनता के साथ लूट जैसा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी सूरत में 100 गुना बढ़े बिल का भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निगम पर पार्षद बिफरे
पार्षदों का कहना है कि बिना संशोधन किए गए बिलों की वसूली कतई स्वीकार नहीं होगी। पहले बिल संशोधित करें, उसके बाद ही भुगतान संभव है। पार्षदों ने जीआईएस सर्वे में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया और बिल वितरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि दोगुना वृद्धि को वे मान सकते हैं, लेकिन जनता की मेहनत की रकम 100 गुना बढ़ाकर वसूली नहीं होने देंगे।
सभी 90 वार्डों में निगम कैंप लगाएगा
अपर नगर आयुक्त लवी त्रिपाठी ने कहा कि शहर के सभी 90 वार्डों में निगम कैंप लगाएगा। जो भवन स्वामी अपने बिल पर आपत्ति जताएंगे, उनका तत्काल निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए मुख्य कर निर्धारण अधिकारी, गृहकर विभाग के अधिकारी और 90 प्रशिक्षित कर्मचारियों को लगाया गया है। शास्त्रीनगर, कंकरखेड़ा और मुख्यालय जोन कार्यालय में भी आपत्ति निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।