सस्ते गल्ले की दुकानों पर सरकारी राशन की कालाबाजारी में अफसरों का हिस्सा भी रहता है, जिसका खुलासा शुक्रवार को हो गया। अगर राशन डीलर हिस्सा पहुंचाने में आनाकानी करता है तो उसकी दुकान निलंबित करने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता है। राशन डीलर नरेंद्र कुमार के अनुसार रुपये नहीं देने पर दुकानें निलंबित भी हो चुकी हैं। इससे पूर्ति विभाग के अफसरों की कार्यशैली की पोल खुल रही है, जिससे साफ है कि पूर्ति विभाग में कदम-कदम पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है।
पहले दो इंस्पेक्टर हुए थे निलंबित, अब इनके पकड़े जाने से कार्यालय खाली
राशन डीलरों व दुकानदारों को कार्रवाई की धमकी देकर रुपये वसूलने की शिकायत मिलने पर डीएम ने एडीएम की अध्यक्षता में समिति गठित कर जांच कराई थी। समिति की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई।
रिपोर्ट के आधार पर शासन ने भ्रष्टाचार मानते हुए खेकड़ा के पूर्ति निरीक्षक राहुल पटेल और बागपत के पूर्ति निरीक्षक दीपक यादव को मंगलवार को निलंबित कर मेरठ खाद्य आयुक्त कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। अब जिला पूर्ति अधिकारी अनूप तिवारी और एआरओ जोगेंद्र सिंह के रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद कार्यालय पूरी तरह खाली हो गया है। अब वहां पर बड़ौत के पूर्ति निरीक्षक राजेश कुमार रह गए हैं।
राशन की जगह ट्रकों में पत्थर भरकर कराया जा रहा था वजन
अप्रैल 26 में एफसीआई गोदाम से राशन ढुलाई के दौरान ट्रकों में पत्थर रखकर वजन कराने का मामला पकड़ा गया था। अफसरों की जांच में परिवहन के दौरान हर महीने करीब 500 से 600 क्विंटल राशन की गड़बड़ी उजागर हुई थी। इसमें पूर्ति निरीक्षक बड़ौत राजेश कुमार ने बिनौली थाने में परिवहन ठेकेदार सूरजपाल सिंह, उसके प्रतिनिधियों और ट्रक चालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
राशन की कालाबाजारी भी बार-बार पकड़ी जा रही
जुलाई 2021 में बिनौली क्षेत्र के एक स्कूल में छापामारी के दौरान 158 क्विंटल गेहूं और चावल बरामद किया गया था। इसके अलावा जनवरी 2022 में कालाबाजारी के लिए ले जाया जा रहा करीब 100 क्विंटल राशन को पकड़ा गया था। वर्ष 2024 में मुगलपुरा में महिलाओं ने अंगूठा लगवाने के बावजूद राशन नहीं देने पर दुकान निलंबित कर दी गई।