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निगम का खेल...17 करोड़ के भवन पर सिर्फ 552 रुपये गृहकर

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मेरठ। निगम का खेल भी गजब है। दस लाख कीमत के भवन पर 4 हजार और शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्किट में 17 करोड़ रुपये के भवन पर सिर्फ 552 रुपये का गृहकर लगाकर बिल जारी कर दिया। इसको लेकर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। निगम इस तरह गृहकर के बिल वितरित करेगा तो कैसे वसूली होगी। नगर आयुक्त ने इस प्रकरण की जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही है।
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भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे जीआईएस सर्वे के आधार पर नया गृहकर वसूलना निगम के सामने चुनौती बना हुआ है। एक साल में निगम गृहकर की वसूली नहीं कर पा रहा है। विकास कार्य के लिए शासन ने धनराशि रोकने की चेतावनी दी, तब आनन-फानन में नए गृहकर के बिल वितरित कर दिए। जिसमें भवन स्वामियों पर दस गुना ज्यादा गृहकर के बिल पहुंच गए। इस पर पार्षदों और आम लोगों ने नाराजगी जता दी।
सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने बृहस्पतिवार को शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्किट स्थित एक व्यवसायिक भवन का गृहकर बिल मीडिया को दिया। उसमें निगम ने भवन की कीमत 17 करोड़ दर्शाने के बाद कुल 554 गृहकर लगाकर बिल जारी कर दिया। जबकि नगर निगम के माधवपुरम सहित कई जगहों पर 10 लाख कीमत के भवन पर चार हजार रुपये तक का गृहकर बिल वितरित हुआ है। इसके अलावा 25 लाख के भवन पर 10 हजार कर गृहकर का बिल भेजा गया हैं। सवाल उठता कि 17 करोड़ के भवन पर कुल 554 रुपये का गृहकर कैसे लगा दिया। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी एसके गौतम का कहना है कि इस मामले की जांच कराई जाएगी।
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