फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निगम की मनमानी : गृहकर-जलकर का विवाद सुलझा नहीं और जल मूल्य के बिल बांटे

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। गृहकर-जलकर निर्धारण के लिए किए गए जीआईएस सर्वे पर भ्रष्टाचार के आरोपों की गुत्थी को नगर निगम एक साल बाद भी नहीं सुलझा पाया है। इसके बावजूद डोर-टू-डोर जल मूल्य की रसीद भवन स्वामियों को बांट दी गई। निगम के अधिकारियों की मनमानी पर बुधवार को का आरोप लगा लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। करीब छह घंटे निगम परिसर में धरना देकर लोगों ने नारेबाजी की।
विज्ञापन

लोगों ने कहा कि 300 रुपये प्रतिवर्ष गृहकर देने वाले 30 हजार और 400 रुपया देने वाले 40 हजार का बिल कैसे जमा करें। गृहकर के बिल में जलकर वसूला जा रहा। नगर निगम की नियमावली कहती है कि जलकल व जल मूल्य में एक ही भवन स्वामियों को जमा करना होता है। निगम की अंधेरगर्दी से परेशान लोगों का बुधवार को गुस्सा फूट गया। करीब छह घंटे निगम परिसर में धरना देकर लोगों ने नारेबाजी की। लोगों ने कहा कि गृहकर के बिल में जलकर वसूला जा रहा है तो जल मूल्य के नाम पर निगम क्यों वसूली करना चाहता है।
लोगों ने दिखाए 30-40 हजार के बिल
वार्ड-60 की पार्षद रेखा सिंह फूलबाग कॉलोनी और नेहरू नगर के लोगों के साथ बुधवार सुबह 11:00 बजे नगर निगम परिसर में धरना पर बैठ गईं। उन्होंने बताया कि अनाप-शनाप गृहकर बढ़ाकर निगम जनता को लूट रहा है। इतना कहते ही धरने पर बैठी महिलाओं और पुरुषों का गुस्सा निगम पर फूट पड़ा। 20 से ज्यादा लोगों ने अपने-अपने भवन का गृहकर के बिल दिखाएं। इसमें प्रतिवर्ष 300 रुपये देने वाले 30 हजार और 400 रुपये वालों के 40 हजार के गृहकर बिल थे।
विज्ञापन

पार्षद के पति नीरज सिंह ने बताया कि गृहकर की वसूली से पहले निगम द्वारा फूलबाग कॉलोनी और नेहरु नगर में डोर-टू-डोर जल मूल्य की रसीद बांट दी। इसमें काफी लोगों ने जल मूल्य जमा भी कर दिया।
समय देकर मिलने नहीं आए नगर आयुक्त
इसकी शिकायत निगम में की लेकिन समाधान नहीं हुआ। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने 11:00 बजे का समय निगम परिसर में मिलना के लिए दिया था। वह नहीं आए तो वार्ड के लोगों के संग धरने पर बैठना पड़ा। निगम मनमानी तरीके से लोगों से वसूली कर रहा है। नियम है कि गृहकर के बिल में जलकल लिया जा रहा हैं तो जल मूल्य की रसीद नहीं वितरित की जा सकती। एक ही कर भवन स्वामियों से जिला जा सकता हैं। छह घंटे धरना दिया गया।
शाम को 5:00 बजे पार्षद और उनके पति ने रात्रि में धरना जारी करने के लिए टैंट और गद्दे मंगाने शुरू किए, तभी नगर आयुक्त वहां पर पहुंचे। नगर आयुक्त ने आश्वाासन दिया कि जिन-जिन भवन स्वामियों से जल मूल्य लिया गया हैं, उनके पैसे को गृहकर के बिल में समायोजित करा देंगे। गृहकर में सुधार के लिए कैंप लगाकर आपत्तियों का निस्तारण कराएंगे, तभी लोग शांत हुए और अपने घर चले गए।

न पानी मिलता और न सीवर लाइन, फिर बिल क्यों दें
धरने पर बैठे लोगों ने बताया कि फूलबाग कॉलोनी और नेहरु नगर में नगर निगम द्वारा कई जगह पर न पानी मिलता और न ही सीवर लाइन हैं। इसके बावजूद लोगों से पानी व सीवर लाइन की वसूली होती हैं। जब निगम सुविधा ही नहीं दे रहा तो उसका टैक्स कैसे ले सकता हैं। पार्षद पति का कहना कि किसी भी सूरत में अपने वार्ड की जनता को लुटने नहीं दूंगा। जहां पानी व सीवर लाइन नहीं है, वहां का टैक्स नहीं दिया जा सकता।

दो माह पहले तारीफ और अब धरने पर बैठी पार्षद
सितंबर माह में निगम की बोर्ड बैठक में जहां पार्षदों ने अफसरों की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाकर हंगामा किया था। तब पार्षद रेखा सिंह ने निगम अफसरों की तारीफ की थी। बुधवार को पार्षद रेखा सिंह निगम में धरने पर बैठी तो अन्य पार्षदों ने उनसे दूरी बना ली। पार्षदों में चर्चा रही कि कि तारीफ करने वाली पार्षद को आज धरने पर बैठना पड़ गया।

गृहकर बिल पर आने वाली आपत्तियों का निस्तारण करने के लिए फूलबाग और नेहरु नगर में कैंप लगाएंगे। जल मूल्य सिर्फ एक बार ही लिया जाता है। डोर-टू-डोर जल मूल्य के बिल वितरित करने की बात गलत है। जिन लोगों से जल मूल्य लिया गया है। उनका पैसा गृहकर के बिल में समायोजित करा दिया जाएगा।
विज्ञापन

सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें