माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) बीमारी के इलाज के लिए नई गाइडलाइंस आई हैं। इसमें बीमारी के इलाज के लिए इनहेलर्स के अलावा फ्लू वैक्सीन, निमोनिया वैक्सीन और एक नई वैक्सीन आरएसवी लेने पर जोर दिया गया। इनसे बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।
डॉ. तोमर ने बुधवार को विश्व सीओपीडी दिवस पर आदर्श नगर में कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें बताया कि इस बार की थीम है, अगर सांस फूलती है तो सीओपीडी बीमारी को खोजें। यह फेफड़ों की बीमारी है, जो वायु प्रदूषण, सिगरेट के धुएं और वातावरण प्रदूषण के कारण होती है। इसमें वायुमार्ग में सूजन, बलगम और सांस लेने में कठिनाई होती है। सामान्य लक्षणों में बलगम के साथ लगातार खांसी, सांस फूलना और थकान शामिल है।
सीओपीडी का पता लगाने के लिए फेफड़ों के कार्य का परीक्षण कराते रहें। सीओपीडी बीमारी के प्रभावी इलाज और आगे की जटिलताओं को रोकने के लिए प्रारंभिक निदान और उपचार महत्वपूर्ण है। सीओपीडी पूरी तरह से ठीक होने वाली बीमारी नहीं है। इसके इलाज का लक्ष्य रोग की प्रगति को धीमा करना और फेफड़ों की कार्यक्षमता में गिरावट को कम करना है।