आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम से तीसरी आंख को शहर में कोई भी अपराधी नहीं दिखा। शहर में 34 स्थानों पर लगाए गए उच्च क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे किसी अपराधी की धरपकड़ या कोई बड़ा केस खोलने में काम नहीं आए। दो माह में कहीं भी पर्स, मोबाइल, चेन लूट या चोरी करते हुए कोई भी बदमाश इन कैमरों में कैद नहीं हुआ। आपराधिक घटनाओं को लेकर थाना पुलिस ने भी संपर्क नहीं किया।
मकसद, जो पूरा नहीं हुआ
दो माह पहले ही पुलिस लाइन में आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम ने काम करना शुरू किया है। शहर में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है और कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, परतापुर, शास्त्रीनगर, गढ़ रोड समेत 34 स्थानों पर उच्च क्षमता के कैमरे लगाए गए थे। जबकि 54 स्थानों पर पहले से कैमरे लगे हुए थे। इन सभी कैमरों को ट्रैफिक कंट्रोल रूम से जोड़ा गया। मकसद था कि ट्रैफिक संचालन के साथ ही इन कैमरों की अपराधों पर रोकथाम और अपराधियों की धरपकड़ में भी मदद ली जाएगी। शहर में जिन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, वहां यदि कोई आपराधिक घटना होती है तो ट्रैफिक कंट्रोल रूम से देखी जा सकती है और उसकी सूचना संबंधित थाना पुलिस को दी जा सकती है। सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के लिए मददगार बन सकती है। पुलिस अफसरों को भी लगा कि कैमरों से बहुत फायदा मिलेगा। लेकिन जब से ट्रैफिक कंट्रोल रूम शुरू हुआ है, तब से एक भी वाहन चोर, चेन या पर्स लुटेरा या मोबाइल फोन झपटने वाला इन कैमरों में कैद नहीं हुआ।
भीड़भाड़ वाले स्थान भी शामिल
जिन स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं उनमें अधिकांश स्थान भीड़भाड़ वाले हैं। ट्रैफिक कंट्रोल रूम में भी तीन पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। दिन के समय किसी भी चौराहे या भीड़भाड़ वाले स्थान को कंट्रोल रूम से ही देखा जा सकता है।
ट्रैफिक पर ज्यादा फोकस
कंट्रोल रूम से अभी तक सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। जहां भी कहीं जाम की समस्या होती है, उस स्थान के लिए कंट्रोल रूम से ही संबंधित क्षेत्र की ट्रैमो बाइक या एंजिल पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को वायरलेस सेट से सूचना देकर भेजा जाता है। हालांकि शहर में जाम से भी कोई खास राहत नहीं मिली है।
संपर्क नहीं किया
एसपी ट्रैफिक संजीव वाजपेयी का कहना है कि किसी भी थाने की पुलिस ने कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फुटेज को लेकर संपर्क भी नहीं किया। कैमरों में किसी भी अपराधी के कैद होने की जानकारी नहीं मिली है।