मेरठ। बैंकों में प्रतिदिन लगाए जाने वाले लाखों चेक में से सैकड़ों चेक बाउंस हो जाते हैं। इसका कारण आपके खाते में अपर्याप्त धनराशि नहीं है, बल्कि संबंधित बैंक में कनेक्टिविटी का न होना है। वहीं बैंक अपनी इस गलती के लिए भी खाताधारक को जिम्मेदार ठहरा देता है। सरकारी हो या निजी बैंक चेक बाउंस होने पर खाताधारकों से 260 से लेकर 500 रुपये तक वसूल रहे हैं। चेक रिटर्न करने पर भी चेक के साथ दी जाने वाली पर्ची पर ‘84 अन्य कारण कनेक्टिविटी फेलीयर’ लिख दिया जाता है।
खाताधारकों का मानना है कि बैंक अपनी इस मनमानी के लिए सॉफ्टवेयर को जिम्मेदार ठहराकर पल्ला झाड़ रहा है। जबकि बैंक में लंबे समय से इस तरह की समस्या चल रही है। कई बार बैंक के उच्चाधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। कुछ व्यापारियों ने बताया कि प्रतिमाह एक या दो चेक कनेक्टिविटी की समस्या से बाउंस हो जाते हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने दवा व्यापारियों से जानकारी की तो मामले सही निकले।
कनेक्टिविटी एक बड़ा कारण
बैंक कर्मचारियों ने बताया कि चेक संबंधित बैंक के हेड ऑफिस में जाता है। वहीं से चेक पास होता है या रिजेक्ट कर दिया जाता है। जिस बैंक का चेक होता है उस बैंक में अगर कनेक्टिविटी की समस्या होती है तो चेक बाउंस हो जाता है। -अभिषेक कुमार, दवा व्यापारी
500 रुपये शुल्क वसूल रहे बैंक
सरकारी बैंक चेक बाउंस का शुल्क 260 रुपये और निजी बैंक 500 रुपये तक वसूलते हैं। खाताधारक की गलती भी नहीं होती तब भी शुल्क देना पड़ता है। - शुभम, दवा व्यापारी
बैंक में बंद कर दिया खाता
पूर्व में सरकारी बैंक में खाता था। कई बार चेक कनेक्टिविटी के कारण बाउंस हुए। ऐसे में निजी बैंक में खाता खोला है। निजी बैंक कनेक्टिविटी के कारण चेक बाउंस होने पर शुल्क नहीं वसूल रहा है। - उपेंद्र बंसल, दवा व्यापारी
व्यापारियों को आर्थिक क्षति
सरकारी बैंकों में भीड़ बहुत रहती है। कर्मचारियों की संख्या भी बहुत कम है। ऐसे में खाताधारकों की समस्या पर कर्मचारी ध्यान नहीं देते। चेक बाउंस होने से व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। -मनोज अग्रवाल, दवा व्यापारी
मैनेजर भी नहीं करते समाधान
चेक बाउंस होने पर मैनेजर सहित अन्य उच्च अधिकारियों से भी शिकायत की गई। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। बैंक अधिकारी मनमानी करते हैं। कोई सुविधा भी नहीं देते हैं। - प्रमोद गुप्ता, दवा व्यापारी
वर्जन
सौ में कभी एक चेक इस तरह की समस्या के कारण बाउंस होता है। ऐसे में खाताधारक बैंक मैनेजर को एक प्रार्थना पत्र देकर पैसा वापस लिया जा सकता है। कई बार कनेक्टिविटी की समस्या सामने आ जाती है। हालांकि बैंक पूर्ण रुप से सतर्कता बरतते हैं। -संजय कुमार, एलडीएम मेरठ।