फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सियासत: 20 वर्ष का सूखा मिटाने की जद्दोजेहद में कांग्रेस, मेरठ में 1999 के बाद हाथ को नहीं मिला जनता का साथ

Tue, 12 Mar 2024 04:52 PM IST
Dimple Sirohi संकल्प रघुवंशी, न्यूज डेस्क, अमर उजाला मेरठ

सार

लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों में उठा पटक तेज हो गई है। मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट दिन ब दिन हॉट सीट बनती जा रही है। वहीं कांग्रेस इस सीट पर 20 वर्ष का सूखा मिटाने की जद्दोजेहद करेगी। 
विज्ञापन
राहुल गांधी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

लोकसभा चुनाव के लिए सियासी दलों ने बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। सियासी रण में उतरने को सूरमा तैयार हैं। भले ही अभी कोई भी दल किसी भी तरह से पत्ते न खोल रहा हो लेकिन अपने सियासी आकाओं की परिक्रमा लगाना सूरमाओं ने शुरू कर दिया है।

विज्ञापन


दिल्ली से लेकर लखनऊ तक लगातार अपने लिए लांबिंग में सियासतदां जुटे हुए हैं। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से उत्साहित कांग्रेस का एक तबका मेरठ सीट के लिए रस्साकसी में जुटे हैं। एक समय कांग्रेस के लिए मुफीद माने जाने वाली मेरठ सीट 20 साल से कांग्रेस हाथ नहीं लग सकी है। 

1952 में रहा कांग्रेस का कब्जा
1952 में देश की पहली लोकसभा के लिए हुए चुनाव में मेरठ को तीन लोकसभा क्षेत्रों में बांटा गया था। मेरठ जिला (पश्चिम), मेरठ जिला (दक्षिण), मेरठ जिला (उत्तर पूर्व)। तीनों ही सीट पर कांग्रेस जीती।
विज्ञापन


इनमें मेरठ पश्चिम सीट से खुशी राम शर्मा, मेरठ दक्षिण से कृष्णचंद्र शर्मा और मेरठ उत्तर-पूर्व से शाहनवाज खान यहां से सांसद बने। 1957 में तीनों लोकसभा सीटों को समाहित कर मेरठ लोकसभा सीट का गठन किया गया। कांग्रेस ने इस चुनाव में शाहनवाज खान को फिर से चुनाव मैदान में उतारा। शाहनवाज यहां से लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए।  

1967 में पहली बार कांग्रेस को मिली हार
तीन बार लगातार जीत दर्ज कराने वाली कांग्रेस को 1967 में पहली बार मेरठ सीट पर हार का सामना करना पड़ा। 1967 में कांग्रेस के खिलाफ खड़े हुए सोशलिस्ट पार्टी के एमएस भारती ने शाहनवाज खान को मात दी। एक ही उम्मीदवार के बल पर लगातार तीन बार जीत हासिल करने वाली कांग्रेस के लिए यह बड़ा झटका था। एमएस भारती ने शाहनवाज खान को भारी वोटों के अंतर से हराया। भारती को जहां 146172 वोट मिले, वहीं शाहनवाज 107276 वोटों पर ही सिमट गए।  

1971 में फिर जीती कांग्रेस
चौथे लोकसभा चुनाव में करारी हार झेलने के बाद भी कांग्रेस ने हार नहीं मानी और 1971 में फिर से शाहनवाज खान को इसी सीट से उतारा। पांचवीं लोकसभा में शाहनवाज ने फिर से जीत अपने नाम लिख दी और कांग्रेस की वापसी करवाई। शाहनवाज मेरठ के चार बार सांसद चुने गए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (ऑर्गनाइजेशन) उम्मीदवार हरी किशन को भारी वोटों के अंतर से हराया। 
विज्ञापन

मोहसिना किदवई दो बार यहां से जीतीं
1980 में कांग्रेस ने नई उम्मीदवार मोहसिना किदवई को मेरठ सीट से उतारा। मोहसिना ने कांग्रेस को शाहनवाज की हार से उबरने में मदद की और पार्टी के नाम जीत दर्ज की। 1980 और 1984 में लगातार दो बार मोहसिना यहां से सांसद चुनी गईं।

1980 में उन्होंने जनता पार्टी (एस) के उम्मीदवार हरीश पाल को हराया और 1984 में जनता पार्टी की अंबिका सोनी को हराया। 1989 में हुए आम चुनाव में कांग्रेस ने फिर से मोहसिना किदवई को खड़ा किया, लेकिन वह हार गईं। 1980 में मोहसिना से हारने वाले हरीश पाल ने ही उन्हें इस साल हराया।  

1999 में भड़ाना ने कराई कांग्रेस की वापसी
1999 में मेरठ सीट पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने बाजी मार ली। 1999 में कांग्रेस उम्मीदवार अवतार सिंह भड़ाना ने कांग्रेस को फिर से जीत दिलाई। लेकिन ये जीत ज्यादा लंबी नहीं चल सकी और 2004 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मार ली। इसके बाद 2009, 2014 व 2019 में लगातार भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल सांसद बने।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें