कोर्ट से सुरेंद्र के पक्ष में आया था फैसला
दथेड़ा गांव के जंगल में जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुरेंद्र और नेमपाल पक्ष का विवाद मंडलायुक्त के न्यायालय भी पहुंचा था। वहां से सुरेंद्र के पक्ष में फैसला आया था, लेकिन सुरेंद्र को जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका था। नेमपाल पक्ष के लोगों ने ही भूमि पर अपना कब्जा कर रखा था।
भूमि पर कब्जे को लेकर होती रही घटनाएं
चौसाना चौकी क्षेत्र यमुना खादर में है। यहां हरियाणा के लोग कृषि भूमि खरीदकर खेती करते हैं, लेकिन इस इलाके में भूमि पर कब्जे को लेकर विवाद भी बने हुए हैं। गांव दथेड़ा के अलावा अन्य गांवों में भी इसी तरह के विवाद पूर्व में सामने आ चुके हैं। दथेड़ा गांव की जमीन को लेकर हुए विवाद में दोनों पक्ष हरियाणा के ही रहने वाले हैं।
उधर, कैराना क्षेत्र में भी यमुना खादर की जमीन को लेकर हरियाणा और यूपी के किसानों में हर साल फसल की कटाई के दौरान फायरिंग होती हैं। बीते वर्ष झिंझाना क्षेत्र के गांव बल्हेड़ा में तो जबरन फसल काटने के विरोध पर एक किसान की गोली मारकर हत्या तक कर दी गई थी।
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