मेरठ। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लिसाड़ी गेट और हापुड़ रोड पर हुए बवाल के सीसीटीवी फुटेज में बांग्लादेशी युवकों के शामिल होने सुबूत मिलने का दावा पुलिस ने किया है। कुछ युवक कश्मीरियों की तरह भी दिख रहे हैं। पुलिस ने फुटेज जुटाकर इसकी जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इंटेलीजेंस की जांच में सामने आया कि झुग्गी झोपड़ियों में रह रहे युवकों को आगे कर आगजनी और फायरिंग की गई। अवैध तरीके से रह रहे इन लोगों को वहां से निकालकर हापुड़ रोड पर लाया गया। हापुड़ रोड पर ही सबसे अधिक बवाल हुआ। खुफिया एजेंसियों ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी है।
लिसाड़ी गेट थानाक्षेत्र में हापुड़ रोड से सटी जाकिर कालोनी, आशियाना कॉलोनी और आसपास के क्षेत्र में करीब 500 से अधिक झुग्गी झोपड़ियां हैं। हापुड़ रोड पर खरखौदा क्षेत्र में भी जमना नगर के आसपास 300 से अधिक झुग्गी झोपड़ियां हैं। इन झुग्गी झोपड़ियों में संदिग्ध बांग्लादेशियों के छिपकर रहने की सूचना पर तीन माह पहले ही शासन ने ऐसे संदिग्ध लोगों के सत्यापन के निर्देश दिए थे। एलआईयू और थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से इन लोगों का सत्यापन कार्य शुरू किया था। जिसके कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई थीं। ये लोग लंबे समय से इन झुग्गी झोपड़ियों में अवैध तरीके से रह रहे हैं, जिनमें अधिकांश पूर्वोत्तर असम, पश्चिम बंगाल और दूसरे क्षेत्रों के रहने वाले भी हैं।
यहां रहकर ये लोग कूड़ा व पॉलिथीन एकत्र करने का काम करते हैं। कई बार चोरी की बिजली जलाने पर भी इनके यहां छापे मारे गए थे। खुफिया विभाग की रिपोर्ट में सामने आया कि हापुड़ रोड पर जिस स्थान से सबसे पहले आगजनी शुरू हुई थी, यहां से जाकिर कालोनी क्षेत्र ज्यादा दूर नहीं है। झोपड़ियों में रहने वाले संदिग्ध लोग बवाल में सबसे अधिक आगे थे। इनकी संख्या भी सैकड़ों की संख्या में बताई गई। यही लोग अलग-अलग स्थानों पर पूरी प्लानिंग के साथ रहे। जाकिर कालोनी से ही कुछ लोग सद्दीक नगर के रास्ते भूमिया पुल और रशीदनगर तक पहुंचे। इनमें कुछ लोगों की पहचान के लिए उन लोगों की मदद ली जा रही है, जिन्होंने संदिग्ध लोगों को किराए के लिए जमीन दे रखी है।
झोपड़ियों में साजिश के तहत आग
खुफिया विभाग की जांच में सामने आया कि जब भी इन झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों का सत्यापन शुरू होता है तो ये लोग साजिश के तहत अपनी झोपड़ियों को ही आग के हवाले कर देते हैं। जिससे यह न पता चल सकेे कि कितने लोग रह रहे और कहां के हैं। आग लगने के बाद पुलिस भी जांच करने नहीं जाती। 25 मार्च 2018 को हापुड़ रोड पर आग से 300 से ज्यादा झुग्गी झोपड़ी जलकर खाक हुईं। 22 अप्रैल 2018 को हापुड़ रोड पर 100 से ज्यादा झुग्गी झोपड़ी जलीं। 2017 में जाकिर कालोनी में 200 से ज्यादा झुग्गी झोपड़ियों में आग लगी थी। 2012 में भी हापुड़ रोड और जाकिर कालोनी में 200 से ज्यादा झुग्गी झोपड़ी आग की चपेट में आईं थीं।
फुटेज में दिखाई दिए यह लोग
सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में कश्मीर और बांग्लादेश के जैसे युवक बवाल करते दिखाई दिए हैं। इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं चलनी शुरू हो गई हैं। शहर काजी और पुलिस-प्रशासन के अधिकारी भी दावा करते हैं कि बवाल कराने में बाहर से युवक आए थे। पूरी प्लानिंग के साथ बवाल को अंजाम दिया गया। यह बात भी सामने आई थी कि दिल्ली से युवकों को बवाल करने के लिए बुलाया गया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बवाल में मारा गया आसिफ नाम का युवक झिलमिल कॉलोनी दिल्ली का निवासी था। जोकि 20-25 युवकों को लेकर बवाल करने के लिये लाया था।
फुटेज की चल रही जांच
सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में कश्मीर के युवक दिखाई दिए हैं। जिनकी जांच पड़ताल चल रही है। कई जगहों की फुटेज कब्जे में ली गई है। जांच पूरी होने पर आगे बताया जाएगा।
-दिनेश शुक्ला, सीओ कोतवाली