लाल घेरे में वांटेड और साथ में तीनों पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में सोतीगंज के वांटेड कबाड़ियों को संरक्षण देने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने से हाथ खींचे जा रहे हैं। एडीजी जोन द्वारा जांच कराने के बाद भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी हो रही है। चर्चा है कि जब तक पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वांटेड कबाड़ी पकडे़ नहीं जा जाएंगे।
सोतीगंज में दिल्ली एनसीआर और दूसरे राज्यों से भी चोरी-लूट के वाहन काटे जाते हैं। सोतीगंज पर शिकंजा कसते ही वाहन चोरी का ग्राफ काफी घट जाता है। इसकी जानकारी पुलिस के आला अफसरों को भी है। दिल्ली के डीसी की फॉर्च्यूनर गाड़ी को चोरी कराने और बेचने में भी सोतीगंज के कबाड़ी की भूमिका रही, जिसमें मेरठ क्राइम ब्रांच के सिपाही भी शामिल बताए गए। सोतीगंज के कबाड़ी और पुलिस की दोस्ती के फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
अमर उजाला द्वारा खुलासा करने के बाद पुलिस अधिकारियों ने सोतीगंज में 105 सीसीटीवी कैमरे लगवाए। मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर कबाड़ी जीशान उर्फ पव्वा समेत चार कबाड़ी धरे गए। लेकिन थोड़ी बहुत कार्रवाई कर पुलिस हर बार की तरह फिर चुप्पी साध गई। लोगों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, कबाड़ियों और पुलिसकर्मियों का गठजोड़ नहीं टूटेगा। नहीं तो कहीं यहां भी कानपुर प्रकरण न दोहरा दिया जाए। क्योंकि जब भी दिल्ली या दूसरे राज्य की पुलिस सोतीगंज में दबिश देती है तो उसका विरोध होना शुरू हो जाता है। वहीं, सदर पुलिस ने रविवार को सोतीगंज के दो कबाड़ी हिरासत में लिए। जिनसे वांटेड कबाड़ी के बारे में घंटों पूछताछ की गई। लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।
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मेहरबानी नहीं कार्रवाई होगी
एडीजी जोन राजीव सभरवाल का कहना है कि पुलिस और सोतीगंज के वांटेड कबाड़ियों की दोस्ती का नेटवर्क कहां तक फैला है, अभी इसकी जांच कराई जा रही है। पुलिसकर्मियों पर कोई मेहरबानी नहीं बल्कि कार्रवाई होगी। एसएसपी से इसकी जांच रिपोर्ट मांगी हुई है।
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