फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेरठ में बिना पंजीकरण दौड़ रहे व्यावसायिक श्रेणी के ट्रैक्टर-ट्राॅली, राजस्व की हो रही क्षति

Mon, 08 Mar 2021 02:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आधी-अधूरी तैयारी के साथ शुरू की गई वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) व्यवस्था लोगों के जी का जंजाल बन गई है। प्लेट बुकिंग के लिए बनाई गई साइट पर जहां व्यावसायिक कार्यों के लिए खरीदे जा रहे ट्रैक्टरों और ट्रालियों के पंजीकरण नहीं हो रहे हैं। आरटीओ को राजस्व का घाटा हो रहा है। बंद हो चुकी कंपनियों के वाहनों को भी एचएसआरपी देने का मामला अभी तक नहीं सुलझ पाया है।
विज्ञापन


सरकार ने एक अप्रैल 2019 से पहले सभी पुराने वाहनों पर भी एचएसआरपी लगाने के आदेश दिए हुए है। जिन वाहनों पर एचएसआरपी नहीं है उनका कोई काम आरटीओ में नहीं हो रहा है। हालांकि फिलहाल के लिए एचएसआरपी बुकिंग की रसीद दिखाकर काम कराने की छूट दी हुई है। यह छूट भी परिवहन विभाग का नया आदेश आते ही कभी भी बंद हो सकती है।

एचएसआरपी बुक कराने के लिए दी गई साइट डब्लूडब्लूडब्लू डॉट एसआईएएम डॉम कॉम पर कामर्शियल कार्य के लिए खरीदे जा रहे ट्रैक्टर ट्राली का विकल्प नहीं होने से इनका पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। इसके चलते हर महीने 10 से 15 ट्रैक्टर-ट्राली बिना पंजीकरण के ही सड़कों पर उतर रही है। बिना पंजीकरण के सड़कों पर चल रही ट्रैक्टर ट्राली से अगर दुर्घटना हो जाए तो बीमा कंपनी इसका क्लेम नहीं देगी।

ट्रॉलियों के पंजीकरण नंबर से बनता है परमिट
मोटर वाहन अधिनियम के तहत ट्रैक्टर ट्रालियों का पंजीकरण करके ट्रैक्टर से अलग नंबर दिया जाता है। ट्राली के नंबर से ही व्यावसायिक कार्यों के लिए परमिट दिया जाता है। एचएसआरपी नहीं मिलने से ऐसी ट्रालियों का न तो पंजीकरण हो रहा है और न ही परमिट मिल रहा है। बिना नंबर और परमिट के ये खुलेआम व्यावसायिक कार्यों में लगी है।

राजस्व की हो रही क्षति
परमिट, फिटनेस नहीं होने से आरटीओ को राजस्व की क्षति हो रही है। व्यावसायिक कार्यों के लिए पंजीकृत ट्राली पर आरटीओ को हर तिमाही 1936 रुपये टैक्स और पांच साल के परमिट के लिए 9000 रुपये फीस मिलती है। ट्रैक्टर पर भी 1575 रुपये तिमाही टैक्स लगता है।
 
विज्ञापन

बंद हो चुकी हैं कंपनियां
देश में बंद हो चुुकी शैवरले और ओपल एस्ट्रा कंपनी की कारों पर एचएसआरपी लगाने की व्यवस्था नहीं हो सकी है। सरकार ने अभी तक तय नहीं किया है कि इन कंपनियों के वाहनों पर कौन सी कंपनी के डीलर एचएसआरपी लगाकर देंगे। इन कंपनियों के वाहन स्वामी पशोपेश में पड़े हैं।

आ रही हैं दिक्कतें
एचएसआरपी साइट में अभी कई विकल्प नहीं होने के चलते दिक्कत आ रही है। ट्रैक्टर की ट्राली का विकल्प शुरू करने के लिए कहा गया है। बंद हो चुकी कंपनियों के वाहनों के लिए मुख्यालय जो भी आदेश देगा उसका पालन किया जाएगा। - श्वेता वर्मा, एआरटीओ मेरठ

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें