हालांकि धरने पर बैठे व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि ये तमाम निर्माण तत्कालीन अधिकारियों की मिलीभगत और देखरेख में हुए इसलिए गाज सिर्फ व्यापारियों पर गिरना न्यायसंगत नहीं है। व्यापारियों का तर्क है कि यदि उस समय अधिकारियों ने इन नियमों का पालन कराया होता तो आज यह संकट की स्थिति पैदा ही नहीं होती।
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किस सेक्टर में क्या है स्थिति
योजना के तहत सेक्टर-1 से 13 तक कुल 6379 आवासीय भवन हैं। सेक्टर-2 में सबसे अधिक 1325 भवन हैं जिनमें 985 में वास्तविक उपयोग हो रहा है जबकि 293 में उपयोग परिवर्तित पाया गया। यहां सबसे ज्यादा 47 व्यावसायिक प्लॉट हैं।
सेक्टर-3 में कुल 96 आवासीय संपत्तियों में से 813 वास्तविक उपयोग में हैं, जबकि 132 परिवर्तित हैं। यहां 15 व्यावसायिक प्लॉट हैं। वहीं सेक्टर-2 में 47, सेक्टर-3 मे 15, सेक्टर-6 में 48, सेक्टर-9 में 7, सेक्टर-12 में 30 और सेक्टर-13 में 83 समेत कुल 230 व्यावसायिक प्लॉट आवंटित थे।
व्यापारी नेताओं ने खोला अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा
व्यापारिक संगठनों का आरोप है कि सारा नुकसान व्यापारी झेल रहा है, जबकि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी सुरक्षित हैं। संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों की संपत्ति पर भी बुलडोजर चलना चाहिए। वहीं दूसरे गुट के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण कराकर कई अधिकारी विदेश तक में बस गए हैं जिनकी जांच कर सख्त सजा दी जानी चाहिए।
मेरठ व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष जीतू सिंह नागपाल, महानगर अध्यक्ष शैंकी वर्मा, सुदीप जैन, नीरज मित्तल, नितिन गर्ग, और शुभम दबलिश ने भी अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। व्यापारियों का गंभीर आरोप है कि पुलिस ने अधिकारियों पर बेहद हल्की धाराएं लगाकर उन्हें संरक्षण दिया है और एफआईआर दर्ज होने के महीनों बाद भी कोई ठोस गिरफ्तारी या कार्रवाई नहीं की गई।
क्या हैं निर्माण के नियम
नई भवन निर्माण उपविधि के अनुसार
100 वर्ग मीटर से कम: फ्रंट में 1.5 मीटर सेटबैक अनिवार्य।
100 से 300 वर्ग मीटर: फ्रंट में 3 मीटर और रियर में 1.5 मीटर सेटबैक जरूरी।
300 से 1000 वर्ग मीटर: बड़े निर्माणों के लिए भी विशिष्ट सेटबैक की अनिवार्यता है।