जिला प्रशासन से लेकर शासन ने स्वास्थ्य विभाग पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। खासकर सीएमओ के चहेते कहे जाने बाबुओं पर शिकंजा कसता जा रहा है। स्थापना पटल देख रहे बाबू दिरेश त्यागी की नियुक्त के मामले में डीएम पंकज यादव ने एडीएम वित्त गौरव वर्मा को जांच सौंपी है।
उधर, लखनऊ से निदेशक प्रशासन अरविंद कुमार सिंह ने सीएमओ को पत्र लिखा है कि साल 2015-16 में जिन कर्मचारियों का मुख्यालय स्तर से स्थानांतरण किया गया था, उन्हें तत्काल रिलीव कर मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाए।
दिरेश त्यागी का जनवरी में ही मुख्यालय की तरफ से सीएमओ कार्यालय से जिला महिला अस्पताल में स्थानांतरण किया गया था, लेकिन उन्हें सीएमओ द्वारा रिलीव नहीं किया गया। जबकि एडी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. मंजू वैश्य शर्मा तीन बार रिमाइंडर भेजकर रिलीव करने को कह चुकी हैं।
इसी बीच दिरेश त्यागी की नियुक्ति को लेकर भी शासन से शिकायत की गई। कहा गया कि साल 1990 में जिस वक्त उनकी नियुक्ति की गई, उस समय पर शासन से नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगी हुई थी। इस पर एडी ने जांच बैठाई और सीएमओ से नियुक्ति संबंधी फाइल देने को कहा, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं दिया गई।
डीएम ने बैठाई जांच
नियुक्ति के मामले में डीएम ने एडीएम वित्त को जांच सौंपी है। वहीं अधिवक्ता संदीप पहले द्वारा नरेश त्यागी के खिलाफ भी शिकायत की गई है। जिसमें कहा गया है कि मलेरिया विभाग का बाबू सीएमओ कार्यालय में अवैध तौर पर काम कर रहा है। सैलरी मलेरिया विभाग से निकाली जा रही है। ऐसे में सारे मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने जांच बैठाई है।
सीट से हटाने की मांग
दिरेश त्यागी स्थापना का काम देख रहे हैं। जांच अधिकारी द्वारा उनकी नियुक्ति को लेकर मांगे जा रहे स्पष्टीकरण से जुड़े पत्र स्थापना की टेबल पर ही जा रहे है। ऐसे में मांग की जा रही है कि जांच पूरी होने तक संबंधित सीट से उन्हें हटा दिया जाए, ताकि जांच प्रभावित ना हो।