फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा से छीनी कुर्सी

Thu, 01 Sep 2016 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
विज्ञापन
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
तबादले के 35 दिन बाद भी पद न छोड़ने वाले सीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा से कुर्सी छीन ली गई। प्रमुख सचिव के आदेश पर एडी ने एकतरफा रिलीव होने का आदेश जारी कर दिया। एडी का आदेश मिलते ही बुधवार शाम एसीएमओ डॉ. शरद त्यागी ने सीएमओ का कार्यभार संभाल लिया।
विज्ञापन

एएनएम भर्ती में खेल, 75 लाख से ऊपर का वित्तीय घोटाले में घिरे डॉ. रमेश चंद्रा का शासन ने तबादला कर दिया था। लेकिन वे मेरठ को नहीं छोड़ना चाहते थे। इसी कारण 35 दिन बाद भी पद नहीं छोड़ा था। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण की सख्ती पर एडी डॉ. मंजू वैश्य शर्मा ने एकतरफा रिलीव का आदेश जारी किया।
जिस वक्त एडी कार्यालय की तरफ से आदेश जारी किया गया, उस वक्त डॉ. रमेश विकास भवन में जिला क्षय रोग विभाग में कुछ पदों के लिए हो रहे साक्षात्कार में बैठे थे। जानकारी मिलते ही वह ऑफिस पहुंचे, लेकिन तब तक डॉ. शरद त्यागी सीएमओ की सीट पर बैठ चुके थे। ऐसे में चाहकर भी डॉ. चंद्रा ऑफिस में नहीं जा सके। डॉ. चंद्रा अपने आवास पहुंचे और सामान पैक कराना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में आवास से एक कर्मचारी भेजा, जिसके हाथों सीयूजी नंबर डॉ. शरद त्यागी का भिजवाया गया।
विज्ञापन


ऐसी विदाई से गिरी पद की गरिमा
जिन हालतों में डॉ. रमेश चंद्रा की कुर्सी छोड़नी पड़ी है, उनसे निश्चित तौर पर सीएमओ पद की गरिमा गिर गई है। 26 जुलाई को प्रशासनिक आधार पर डॉ. रमेश चंद्रा का लखनऊ स्थानांतरण किया गया। इसके एक दिन बाद एडी ने सीएमओ को पत्र लिखकर तत्काल सीनियर चिकित्सक को चार्ज सौंप कर रिलीव हो जाने का आदेश दिया। उस वक्त उन्होंने कांवड़ यात्रा के बाद रिलीव होने की बात कही, लेकिन फिर चुप्पी साध गए। एडी ने फिर रिमाइंडर भेजा। 19 अगस्त को शासन ने मुख्यमंत्री के आदेश पर सीएमओ के खिलाफ 75 लाख से ऊपर के घोटाले में जांच बैठा दी, जिसका संज्ञान लेते हुए 23 अगस्त को सीएमओ को उन्होंने तत्काल रिलीव होने का आदेश दिया, लेकिन वह नहीं गए।

सपा नेता का मिलता रहा संरक्षण
इस एक महीने के दौरान सीएमओ को कुछ लोगों का संरक्षण मिलता रहा। सूत्रों का कहना है कि एक सपा नेता ने उन्हें पद पर बने रहने का भरोसा दिया था, जिसके भरोसे एक महीना कट गया। लेकिन शासन में बैठे उच्च अधिकारी मामले में सख्ती दिखाते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें