मेरठ में इमरजेंसी का ‘कायाकल्प’ करने के बाद भी अधिकारी मुख्यमंत्री के कई सवालों पर घिर गए। सीएम ने प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता से पूछा कि यह स्पेशयलिटी हॉस्पिटल है तो मरीज रेफर क्यों किए जाते हैं? इस पर प्राचार्य ने कहा कि कई स्पेशलिस्ट डॉक्टरों समेत 86 मेडिकल स्टाफ कम है।
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प्राचाचार्य से जानकारी लेते सीएम योगी
सीएम का अगला सवाल था कि यहां डायलिसिस मुफ्त क्यों नहीं कराई जाती है। प्राचार्य बोले, यह मेडिकल शिक्षा के अंतर्गत आता है, इसलिए चार्ज लिया जाता है। सीएम ने कहा कि मेडिकल स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा दोनों में ही डायलिसिस मुफ्त होनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ये मंडल है, यहां आसपास केजिलों से भी मरीज आते होंगे, यहां तो व्यवस्था और बेहतर होनी चाहिए। इस पर प्राचार्य ने कहा, कुछ कमियां हैं, जिन्हें जल्द दूर कर लिया जाएगा।
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इमरजेंसी में मरीजों से मिलने पहुंचे योगी
सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ प्रस्तावित कार्यक्रम (सुबह 9:45 बजे) से 36 मिनट बाद मंगलवार सुबह 10:21 बजे मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी पहुंचे। उनकेसाथ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह भी थे।
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अस्पताल में खुशी मनाते डॉक्टर
उन्होंने सबसे पहले मरीजों से हालचाल पूछा। मरीजों से सवाल किए कि क्या परेशानी है, कब भर्ती हुए, इलाज कैसा चल रहा है, दवाइयां मिल रही हैं या बाहर से मंगाते हैं और अब कैसी तबियत है। उनके तीमारदारों से भी बात की। इसके बाद ट्रॉमा सेंटर गए।
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हॉस्पिटल में पार्टी करते डॉक्टर
वहां प्रथम तल पर बने आईसीयू वार्ड में भी मरीजों से बीमारी, इलाज और दवाइयों केबारे में पूछा। हालांकि किसी भी मरीज ने उनसे शिकायत नहीं की। सभी ने यही कहा कि उनका इलाज बेहतर चल रहा है। इसके बाद सेफ हाउस देखकर वापस ग्राउंड फ्लोर पर आए। इस दौरान मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, एसआईसी (प्रमुख अधीक्षक) आदि उनके सवालों के जवाब देते रहे। 21 मिनट बाद 10:42 बजे जब सीएम इमरजेंसी से रवाना हुए तो मेडिकल कालेज स्टाफ ने राहत की सांस ली।
निरीक्षण के दौरान सीएम ने 10 मरीजों से हाल पूछा। मेडिकल कालेज प्राचार्य को कई हिदायतें दीं, मगर उनका लहजा तल्ख नहीं था। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अन्य स्टाफ सीएम के निरीक्षण में खुद को ‘पास’ मान रहे हैं। हालांकि इस दौरान मेडिकल कॉलेज के स्टाफ में अफरा-तफरी मची रही। सीएम के जाने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली।