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खबर का असर: अमर उजाला के खुलासे पर मुख्यमंत्री योगी की मुहर, एसडीएम पर गाज

Tue, 24 Nov 2020 10:59 AM IST
Dimple Sirohi अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • बुढ़ाना के एसडीएम कुमार भूपेंद्र को पदावनति कर तहसीलदार बनाने का मामला
  • सरधना तहसील के ग्राम सिवाया का मामला 
  • अमर उजाला ने 23 नवंबर 2016 को किया था इस मामले का खुलासा 
  • तत्कालीन डीएम ने एसडीएम सहित कई के खिलाफ कराई थी एफआईआर 
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सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के सिवाया स्थित एक कालोनी में जमीन को लेकर हुए खेल और अमर उजाला द्वारा किए गए खुलासे पर अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा निर्णय लिया है। तत्कालीन एसडीएम जो कि इस समय मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना तहसील में एसडीएम कुमार भूपेंद्र की पदावनति कर उन्हें एसडीएम से तहसीलदार बनाने का आदेश दिया है। 
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ये था पूरा मामला 
एनएच-58 पर ग्राम सिवाया के पास एक बिल्डर द्वारा वर्ष 2013 में कॉलोनी का निर्माण शुरू किया गया। इस दौरान बिल्डर ने सरधना के तत्कालीन एसडीएम को आवेदन पत्र दिया कि उसकी कॉलोनी के बीच में सरकारी पशुचर की जमीन आ रही है। ऐसे में इस जमीन को बिल्डर के नाम कर दिया जाए और बदले में दूसरी जगह जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी।

नियमों का उल्लंघन कर सेटिंग
इस आवेदन के बाद तत्कालीन एसडीएम ने जमीन 25 मार्च 2013 को बिल्डर के नाम दर्ज कर दी। जबकि नियमानुसार यह मामला शासन के पास प्रस्ताव बनकर जाना था और वहां से दिशा-निर्देश मिलने के बाद जमीन ट्रांसफर होनी थी।
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इस मामले में जब तत्कालीन डीएम नवदीप रिणवा से शिकायत हुई तो उन्होंने तत्काल प्रभाव से एसडीएम अखंड प्रताप सिंह को हटाकर अरविंद मिश्रा की तैनाती कर दी। अरविंद मिश्रा ने 11 फरवरी 2014 को पूर्व एसडीएम के आदेश निरस्त कर जमीन वापस कराने के आदेश दिए।

अपर आयुक्त के यहां आदेश खारिज
इस मामले में बिल्डरों ने कमिश्नर के यहां अपील दायर की। जिस पर अपर आयुक्त ने अपील स्वीकार करते हुए 27 अगस्त 2014 को एसडीएम अरविंद मिश्रा के आदेश निरस्त करते हुए पूर्व एसडीएम का आदेश बहाल कर दिया।

न शासन को रिपोर्ट, न अपील
नियमानुसार अपर आयुक्त के आदेश आने पर एसडीएम सरधना को इस मामले पर पूरी रिपोर्ट बनाकर जिलाधिकारी को सौंपनी थी। डीएम के माध्यम से यह मामला शासन में जाता या फिर अपर आयुक्त के आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय या राजस्व परिषद में अपील करनी थी। जहां से सुनवाई के बाद इस पर कोई फैसला होता। क्योंकि पशुचर या सरकारी जमीन के मामले में तहसील या जिला स्तर से फैसले लेने का अधिकार नहीं है। लेकिन तहसील सरधना के अधिकारी साठगांठ के तहत मौके के इंतजार में आदेश दबाकर बैठ गए। जब जिलाधिकारी पंकज यादव का ट्रांसफर हुआ और नए  डीएम के रूप में जगत राज त्रिपाठी ने कार्यभार संभाला, तभी चुपके से जमीन 11 अगस्त 2016 को बिल्डरों के नाम कर दी गयी।
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समाचार प्रकाशित होने पर हुई एफआईआर
इस मामले का खुलासा अमर उजाला ने किया तो तत्कालीन डीएम बी. चंद्रकला ने इस पर जांच कराई। जांच में मामला सही पाए जाने पर बिल्डर सहित तत्कालीन और पूर्व एसडीएम सहित लेखपाल व दो अन्य के खिलाफ सरधना थाने में एफआईआर दर्ज कराते हुए रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। 

एक केंद्रीय मंत्री से जुड़ा है मामला 
जिस बिल्डर ग्रुप को जमीन दी गई थी, वह एक केंद्रीय मंत्री से जुड़ा है। हालांकि पहले केंद्रीय मंत्री का नाम इस बिल्डर ग्रुप में था, लेकिन अब नहीं है। ऐसे में माना जा  रहा था कि मामला दब जाएगा। लेकिन कुछ लोगों की लगातार शिकायत के बाद फाइल फिर से तलब हुई और मुख्यमंत्री के तालाबा व चारागाह आदि की जमीन को लेकर चल रहे सख्त रवैये के तहत यह कार्रवाई हुई। माना जा रहा है कि इस मामले में अभी कई अन्य अधिकारी और कर्मचारियों पर भी गाज गिरना तय है।

एक और मामला मुख्यमंत्री के दरबार में 
चारागाह की जमीन बिल्डर को देने का एक और मामला सरधना तहसील का सामने आया है। यह मामला पल्हैड़ा गांव का है। इसकी शिकायत भी स्थानीय स्तर पर हो चुकी है। लेकिन इसमें अभी तक कोई कार्रवाई न होने पर यह मामला भी पिछले दिनों मुख्यमंत्री दरबार में पहुंच चुका है। इसमें भी जल्दी कार्रवाई होने की चर्चा है।
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