मुख्यमंत्री के इंतजार में शिलान्यास के पत्थर ट्रक में लदे ही रह गए। पहले तो पत्थर मंगवा लिए, लेकिन जैसे ही सूचना आई कि सीएम नहीं आ रहे तो पत्थर ट्रक से उतरवाए तक नहीं। ठेकेदार अधिकारियों के चक्कर काटता रहा, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। बाद में एमडीए अधिकारियों ने गोदाम में पत्थर रखवाया।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का सात मई को मेरठ का दौरा प्रस्तावित था। 51 योजनाओं का एक साथ पुलिस लाइन में अनावरण होना था। शिलापट लाने और उस पर स्टेेेेंसिल के जरिये योजना का नाम व अन्य ब्योरा खुदवाने की जिम्मेदारी मेरठ विकास प्राधिकरण को दी गई थी।
एमडीए के अधिकारियों ने दो शिलापटों से लदे दो मिनी ट्रक मंगा लिए। एक ट्रक में 21 शिलापट थे तो दूसरे में लोहे के स्टैंड थे। ये ट्रक कभी एमडीए तो कभी कलक्ट्रेट के चक्कर लगाते रहा। अचानक पता चला कि सीएम नहीं आ रहे हैं तो किसी ने ट्रक चालकों को यह नहीं बताया कि पत्थर अब कहां उतारेंगे।
शुक्र यह रहा कि अभी इन पत्थरों पर स्टेंसिल के जरिए योजनाओं के नाम नहीं खुदवाए गए हैं। ऐसे में ट्रक चालकों ने थककर दोनों गाड़ियां पुलिस लाइन गेट के पास ले जाकर खड़ी कर दीं। डीएम पंकज यादव से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में एमडीए अधिकारियों ने इन पत्थरों को गोदाम में उतरवाया।
अब 15 को आ सकते हैं सीएम
मुख्यमंत्री का 7 मई को मेरठ दौरा प्रस्तावित था। इसके लिए उनकी सहमति भी प्रशासन को मिल गयी थी। इस दौरे में उन्हें मुख्य रूप से मेरठ-करनाल मार्ग का लोकार्पण करने के साथ ही पुलिस लाइन में ई रिक्शा और श्रम विभाग द्वारा जानी, रोहटा, सरूरपुर ब्लाक के मजदूरों को साइकिल वितरण का कार्यक्रम था।
अचानक बुधवार दोपहर उनके कार्यक्रम स्थगित होने की सूचना प्रशासन को मिल गई। दौरा स्थगित होने से प्रशासन सहित तमाम विभागों के अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। हालांकि अब 15 मई के बाद दौरा होने की बात कही जा रही है।
वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक हलके में चर्चा है कि इस दौरे को लेकर सपाई ही एकजुट नहीं थे। सिवाल, कैंट और सरधना विधानसभा क्षेत्र के बार्डर में लगने वाले मेरठ करनाल मार्ग पर हर कोई अपने यहां जनसभा कराना चाहता है। ऐसे में आपसी खींचतान में कार्यक्रम स्थगित हुआ है। क्योंकि सपाई चाहते हैं कि मुख्यमंत्री आएं तो ग्रामीण क्षेत्र में एक जनसभा को भी संबोधित करें।