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घाटे की सड़क पर दौड़ रहीं सिटी रोडवेज बस, आरटीआई में खुली पोल

Thu, 22 Jun 2017 02:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहरवासियों को बेहतर एवं सुगम यातायात की सुविधा देने के लिए रोडवेज को मिलीं 120 सिटी बसें कबाड़ होती जा रही हैं। उचित रखरखाव और बेहतर संचालन के अभाव में एमसीटीएसएल पिछले पांच साल में लगातार घाटे में जा रही है। ये बसें रूट से हटकर वर्कशाप में खड़ी होने लगी हैं। बुधवार को वर्कशाप में करीब 60 बसें खड़ी मिलीं। इसमें से करीब 30 बसें पूरी तरह खटारा हो चुकी हैं।
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यूपीए सरकार ने जेएनएनयूआरएम योजना के तहत प्रदेश के बड़े महानगरों के लिए वर्ष 2009 में लो फ्लोर व छोटी सिटी बसें उपलब्ध कराई थीं। नगर विकास विभाग को इन बसों के संचालन का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन नगर विकास विभाग ने बसों के संचालन का अनुभव नहीं होने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर दिए थे। इसके बाद इन बसों का संचालन रोडवेज को सौंप दिया गया था। मेरठ महानगर के लिए भी इस योजना से करीब 12 करोड़ रुपये की छोटी-बड़ी 120 बसें मिली थीं। जिन बसों का मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (एमसीटीएसएल) नाम से कंपनी बोर्ड बनाकर संचालन 16 रूटों पर किया जा रहा है। लेकिन तमाम दावों के बावजूद कंपनी अधिकारी इन बसों का संचालन करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। उचित रखरखाव के अभाव और गैर जिम्मेदाराना संचालन से बसों की हालत खस्ता हो गई हैं।

आरटीआई में खुली पोल
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने आरटीआई के तहत कंपनी से पिछले पांच वित्तीय वर्ष का लाभ-हानि का ब्योरा मांगा था। कंपनी की ओर से दी गई जानकारी में पिछले पांच साल से कंपनी को लगातार घाटा हो रहा है। घाटे की भरपाई के लिए किराया बढ़ाने पर भी कंपनी को लाभ नहीं पहुंच रहा है। 
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60 बसें खड़ी मिलीं वर्कशाप में 
मामले की पड़ताल करने के लिए अमर उजाला टीम ने सोहराबगेट बस अड्डा स्थित एमसीटीएसएल वर्कशाप का दौरा किया तो वहां पर खराब बसों की लंबी लाइन लगी थी। कुछ बसें कर्मचारियों के नहीं आने से ऑनरोड नहीं हो पाई थीं। यहां पर कुल 60 बसें मिलीं, जिनमें से करीब 30 बस ऑन रोड होने की हालत में नहीं हैं। 

यही हाल रहा तो दम तोड़ देगी कंपनी 
अगर यही हाल रहा तो एमसीटीएसएल जल्द ही दम तोड़ देगी। 120 बसों में 30 बस लगभग खराब हो चुकी हैं। 30 से ज्यादा बसे स्टाफ के नहीं आने से खड़ी रह जाती हैं। खर्च अधिक और आमदनी कम होने से कंपनी लगातार घाटे में जा रही है। 
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ये हैं पांच साल के घाटे का ब्योरा 
वित्तीय वर्ष         लाभ     हानि (लाख रुपये में)
2012-13       शून्य            278.48
2013-14       शून्य             111.52
2014-15       शून्य             92.82
2015-16        शून्य           28.62
2016-17       शून्य             84.77
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