हाईकोर्ट के आदेश पर बंद हुई प्राइवेट सिटी बसे जुगाड़बाजी से फिर सड़क पर दौड़ने लगी हैं। इन जर्जर बसों पर नंबर तक नहीं लिखा है। बस आपरेटरों के बुलंद हौसले खराब सिस्टम की पोल खोल रहे हैं। 27 जनवरी 2009 को हाईकोर्ट ने नगर बस सेवा को बंद करने का आदेश दिया था। आदेश के बाद आरटीओ ने बसों के परमिट का नवीनीकरण और फिटनेस करना बंद कर दिया था।
कई साल मामला लटका रहने के बाद गत 22 अगस्त को आरटीए ने प्राइवेट सिटी बसों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस बाबत आरटीओ के नोटिस देने के बाद आपरेटरों ने अपनी बस खड़ी कर दी थी। लेकिन कुछ दिन शांत बैठने के बाद आपरेटरों ने जुगाड़बाजी करके अवैध बसों को फिर से रूटों पर उतारना शुरू कर दिया है।
बस स्टाफ से बात की तो नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने बताया कि पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारियों की जेब गरम करके बस चलाई जा रही है। जब अधिकारियों ने सख्ती की थी तब बंद कर ली थी।
एक बस को मिली है परमिशन
आरटीओ द्वारा परमिट नवीनीकरण नहीं करने के मुद्दे पर राज्य परिवहन अपीलीय न्यायाधिकरण गए एक ऑपरेटर की बस (यूपी-15एटी 0902) को परमिट देने के आदेश किए गए थे। यह बस परमिट लेकर चलाई जा रही है। इसकी आड़ में दूसरे ऑपरेटरों ने भी अपनी बस उतारनी शुरू कर दी है।
एसटीएटी से केवल एक बस को परमिट दिया गया है। इसके अलावा किसी भी बस के संचालन के लिए आदेश नहीं है। अवैध रूप से चल रही सिटी बसों का मामला संज्ञान में आया है। इन्हें जल्द ही पकड़कर बंद कराया जाएगा। -विश्वजीत सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन