विधानसभा चुनाव के बाद एमडीए अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाएगा। शहर में काफी कालोनियां ऐसी हैं जहां मानचित्र में कुछ है और मौके पर कुछ और बनाया गया है। ऐसी सभी कॉलोनियों को चिहिन्त कर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यत: यहां से शमन शुल्क वसूलने की तैयारी है।
वर्तमान में कहने को रीयल एस्टेट का बाजार ठंडा पड़ा है, लेकिन मेरठ में खूब आवासीय कॉलोनियां गुलजार हो रही हैं। जिनमें से कुछ में जमकर अवैध निर्माण हुआ हैं। अवैध निर्माण भी दो तरह के हैं। एक, जहां कॉलोनी पूरी तरह से ही अवैध है। न नक्शा स्वीकृत कराया गया है और न ही उस जमीन का उपयोग आवासीय है। दूसरे, ऐसी कॉलोनियां जिनका मानचित्र स्वीकृत कराया गया है। लेकिन उसकेविपरीत निर्माण हो रहा है। मसलन, ले आउट में जहां पार्क है वहां निर्माण कर दिया गया है। क्लब ले आउट में है तो पर मौके पर कुछ और ही बना है। ऐसी कॉलोनियों से शमन शुल्क वसूला जा सकता है, लेकिन अवैध कॉलोनियां का तो ध्वस्तीकरण ही विकल्प है। इसके अलावा ऐसी भी काफी कॉलोनियां हैं, जिनका नक्शा कम क्षेत्रफल का स्वीकृत कराया गया है जबकि आधे से ज्यादा कॉलोनी अनाधिकृत रूप से डेवलप की जा रही हैं। शहर की 50 से ज्यादा कॉलोनियों में यह खेल हुआ है। बाईपास से लेकर दिल्ली रोड, मवाना रोड, गढ़ रोड, रुड़की रोड, रोहटा रोड, बगपत रोड आदि में ऐसी विभिन्न कॉलोनियां हैं।
सभी जोन प्रभारी हाेंगे मुस्तैद
वीसी योगेंद्र यादव ने सभी जोन प्रभारियों को बुलाकर निर्देशित किया है कि वह अपने अपने क्षेत्र में सर्वे करें। पहले भी इस पर मशक्कत को चुकी है, पर अब दोबारा से सर्वे करना होगा। जांच की जाएगी कि किन कॉलोनियों में अनाधिकृत रूप से आवास बनाए जा रहे हैं। एप्रूव्ड के नाम पर कहां-कहां अवैध निर्माण किए जा रहे हैं।
वसूला जाएगा शुल्क
फिलहाल चुनावी बयार चल रही है। ऐसे में यह कार्रवाई चुनाव बाद होगी, पर तब तक होमवर्क पूरा करने को कहा गया है। चारों जोन में जोन प्रभारी के नेतृत्व में वीडियोग्राफी टीम का गठन किया गया है। यह टीम अवैध निर्माण की फोटो भी खींचेगी और वीडियोग्राफी भी करेगी। साथ ही क्षेत्रफल माप कर यह आंकलन किया जा सकता है। दरअसल, इस समय यदि कार्रवाई की बात की जाए तो पुलिस उपलब्ध नहीं होगी। यही कारण है कि चुनाव बाद की कार्रवाई की जाएगी।
मौके पर लेआउट से होगा मिला
जिन कॉलोनाइजर ने अपनी कॉलोनियों का लेआउट स्वीकृत कराया है, उसकी एक-एक फोटो कॉपी सभी जोन प्रभारियों और टीम को दी गई है। इस लेआउट से ही मौके पर जाकर यह मिलान होगा कि कॉलोनी में निर्माण मानचित्र के हिसाब से हो रहा है या उसके विपरीत।