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कोरोना से दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है कोरोना

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मेरठ। कोरोना काल में उपजे भारत-चीन के बीच विवाद ने एक बार फिर सबकी नजरें लद्दाख पर टिका दी हैं। पिछले 15 दिन से चल रहे सीमा विवाद पर शनिवार को चीन के मोल्डो इलाके में दोनों देशों के कमांडरों के बीच हुई बैठक में ठोस नतीजा नहीं निकल सका। हालांकि, भारत ने चीन से साफ शब्दों में पेंगोंग झील से सेना का जमावड़ा हटाने के लिए कह दिया। अमर उजाला ने सेना के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों से सीमा पर उपजे विवाद से उत्पन्न हालात पर चर्चा की।
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चीन के खिलाफ पूरा विश्व
जून 2014 तक मिलिट्री इंटेलिजेंस में डायरेक्टर जनरल और मेरठ के सब-एरिया में जीओसी रहे लेफ्टिनेंट जनरल आरएन सिंह ने सीमा विवाद पर कहा कि चीन का मकसद सिर्फ कोरोना से दुनिया का ध्यान भटकाना है। अब पूरा विश्व चीन के खिलाफ हो चुका है। वह बायोलॉजिकल वार का प्रयोग करके अमेरिका को नुकसान पहुंचाना चाहता परंतु यह पूरे विश्व में फैल गया। वह भारत को सिर्फ ऐसे ही आंख दिखाता रहेगा। उसकी इतनी हिम्मत नहीं कि वह युद्ध कर सके। वह हमारी बाउंड्री को कब्जाना चाह रहा है परंतु हमारी सेना मुकाबले के लिए तैयार है। वह अमेरिका की टेक्नोलॉजी से अपनी होड़ करता है परंतु अमेरिका ही अग्रणी है। वह भलीभांति जानता है कि अमेरिका और भारत के संबंध ठीक हैं। इसलिए वह भारत को बार-बार परेशान करता है। वह न्यूक्लियर चला नहीं सकता। इसलिए उसने बायोलॉजिकल वार का रास्ता चुनकर अमेरिका को परेशान किया।
भारत की सीमा कब्जाना चाहता है चीन
लद्दाख इलाके में वर्ष 2016 में सिग्नल ऑफिसर इन चीफ रह चुके लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली का कहना है कि चीन की सीमा 13 देशों से लगती है। वह 12 देशों की सीमाओं को कब्जा चुका है। अब वह भारत की तरफ देख रहा है परंतु ऐसा होने वाला नहीं है। वह भारत को एशिया तक सीमित रखना चाहता है। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण पूरा विश्व उसके खिलाफ हो रहा है। इसके चलते कुछ देश उससे ट्रेड कट करने को तैयार हैं। इसलिए वह बॉर्डर एरिया में सड़क, एयर फील्ड आदि बना रहा है। जिससे इंडस्ट्री को मजबूत कर सके। उसने वियतनाम का पोर्ट गिराया, मलेशिया के टैंक को मारा, भूटान मिला लिया, सिन्कीयान के लोगों को कन्वर्ट कर रहा है। लद्दाख में हमारी सेना अलर्ट है। चीन हमारा कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा। हमें सिर्फ अलर्ट रहने की जरूरत है।
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