मेरठ। दिन में गर्मी और सुबह-रात मौसम नमी। मौसम का यह बदलाव, बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने और लापरवाही बरतने के कारण वह बीमार हो रहे हैं। खांसी-जुकाम और बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में 18 बेड हैं, जो इस समय फुल हैं। इनके अलावा बच्चों की संख्या ज्यादा होने पर बच्चों को पुरुष वार्ड में खाली बेड़ों पर शिफ्ट किया गया है। एक बेड पर दो-दो बच्चों का भी लिटाना पड़ा है। मेडिकल कॉलेज में 50 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। निजी अस्पतालों की बात करें तो यहां छोटे-बड़े करीब 250 अस्पताल और नर्सिंग होम हैं, जहां 500 से ज्यादा बच्चे भर्ती हैं। इनमें शून्य से 10 साल तक के बच्चे ज्यादा हैं। बच्चों की प्रतिरक्षण प्रणाली ज्यादा मजबूत नहीं होती है, लिहाजा इस मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है, ताकि बच्चा स्वस्थ रहे।
बच्चों को मच्छरों से बचाएं
चिकित्सकों का कहना है कि परिजन ध्यान दें कि बच्चे घर से बाहर पूरे कपड़े पहनकर जाएं। जहां खेलते हों, वहां आसपास पानी न जमा हो। स्कूल प्रशासन इस बात का ध्यान रखे कि स्कूलों में मच्छर न पनप पाएं। बहुत छोटे बच्चे खुलकर बीमारी के बारे में बता भी नहीं पाते, इसलिए अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा हो, बेचैन हो, उसे तेज बुखार हो, शरीर पर रैशेज हों, उलटी हो या इनमें से कोई भी लक्षण हो तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
यह बरतें सावधानी
गरिष्ठ और फ्रीज में रखा खाना न खिलाएं।
दोबारा गर्म कर बासी खाने को न दें।
छह माह तक के बच्चे को मां का दूध ही पिलाएं।
बच्चे के बीमार होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
मौसमी फल खिलाएं
इन दिनों में बच्चों की पाचन शक्ति अक्सर कमजोर हो जाती है। लिहाजा बच्चों को हल्का तथा पौष्टिक भोजन ही देना चाहिए। साथ ही उन्हें ठंडे और गर्म चीजों का सेवन एक साथ न करने दें। मौसम के अनुकूल फलों का सेवन बच्चों को कराना चाहिए। - डॉ. श्रीओम, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
बढ़ रही बच्चों की तादाद
बच्चों की ओपीडी में बढ़ोतरी हुई है, जहां पहले 200 बच्चे आ रहे थे, वहां अब इनकी तादाद 250 से 300 पहुंच रही है, जो लगातार बढ़ती जा रही है। - डॉ. विजय जायसवाल, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज