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बच्चों ने प्रस्तुत की गौर लीला

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इस्कॉन ने मनाई गुरु पूर्णिमा एवं जगन्नाथ पर्व
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दिल्ली रोड न्यू शंभूनगर और रुड़की रोड सुपरटेक में हुआ आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। न्यू शंभूनगर में अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावनामृत संघ ने गुुरु पूर्णिमा और जगन्नाथ मिश्र पर्व मनाया। यहां मुख्य अतिथि अरविंद अग्रवाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कमल ठाकुर ने अक्रूर प्रभु का माल्यार्पण कर स्वागत एवं अभिषेक किया। इस दौरान भक्ति वृक्ष के बच्चों ने गौर लीला का मंचन किया।
मल्टी मीडिया शो के माध्यम से अक्रूर प्रभु ने बताया कि चैतन्य महाप्रभु करीब 500 साल पहले बंगाल प्रांत के नवद्वीप नगर के श्रीधाम मायापुर स्थान में प्रकट हुए थे। उनके पिता का नाम जगन्नाथ मिश्र और माता शची देवी थी। वह स्वयं श्रीकृष्ण हैं जो चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुए। राधा रानी का गौर वर्ण धारण किया है। श्रीकृष्ण के विशुद्ध प्रेम का सर्वत्र वितरण कर रहे हैं। भगवान के कई अवतार हुए। इस बार जन सामान्य को तथा साथ ही धर्मविदों एवं दार्शनिकों को समस्त कारणों से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य स्थिति के विषय के उपदेश देने के लिए महान भगवद् भक्त के रूप में प्रकट हुए थे। इसके उपरांत इस्कॉन भक्ति वृक्ष जिसमें मानसरोवर, सरस्वती लोक, देवपुरी से आए बच्चों ने गौर लीला का आयोजन किया। कार्यक्रम के अंत में नरसिंह आरती के उपरांत फूलों की होली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विश्व योग दास, राजा जुनेजा, नरेश शर्मा, संजय माहेश्वरी, गोपाल गौतम, अनिल आदि लोग मौजूद रहे।
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चैतन्य महाप्रभु की जयंती पर आयोजन
मेरठ। इस्कॉन द्वारा रुड़की रोड सुपरटेक पर श्री चैतन्य महाप्रभु की जयंती मनाई गई। महाप्रभु की आरती द्वारिका वासी ने कराई। महा अभिषेक सदाशिव केशव दास ने कराया। इस दौरान हरिनाम संकीर्तन में हरे कृष्ण महामंत्र पर सभी ने फूलों की होली खेली। भक्तों ने मंत्रमुग्ध होकर कीर्तन और नृत्य किया। समापन पर सचिंद्र गौर ने प्रसाद वितरित किया। रूपवान दास ने बताया कि महाप्रभु वैष्णव के प्राण धन है और राधा-कृष्ण का मिश्रित अवतार हैं। वह दया एवं करुणा से सरलता से पतितों का उद्धार कर उन्हें मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। जो मनुष्य का धर्म है जगन्नाथ बलदेव सुभद्रा के साथ रंगों की होली का भी सभी ने आनंद लिया। यहां नीलेश्वर, वसुदेवदुलाल, विजयपाल, कपिल, रूपवती, लक्ष्मी, दया देवी, रंजना, सिमरन, आयुषी, चिराग, शशांक, ध्रुव, शुभ, चैतन्य आदि मौजूद रहे।
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