शास्त्रीनगर ई ब्लॉक में 23 बच्चे बरामद होने पर डीएम पंकज यादव ने मजिस्ट्रेट जांच बैठा दी है। वहीं बृहस्पतिवार को मेरठ आकर प्रशासन को कागजात दिखाने का दावा करने वाला संस्था का डायरेक्टर दीपक गौड़ नहीं आया।
जिला प्रोबेशन अधिकारी द्वारा इस गंभीर मामले में प्रभावी कार्रवाई न किये जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस तरह से बच्चों के सरनेम बदले गए, वह कहीं न कहीं धर्मांतरण की तरफ इशारा कर रहा है।
चाइल्ड लाइन की निदेशिका अनीता राणा और बाल संरक्षण अधिकारी दीपिका भटनागर ने बुधवार को शास्त्रीनगर ई ब्लाक में रिटायर कर्नल के मकान में 23 बच्चे बरामद किए थे। वहां अनीता गौड़, गगन अरोड़ा उर्फ राज, प्रेमलता और एक अमेरिकन युवती गैलिना केल्टिना बच्चों की देखरेख करती मिली थीं।
अनीता गौड़ ने बताया था कि उनकी संस्था इमैनुअल सेवा ग्रुप है, जिसका मुख्य कार्यालय दिल्ली में हैं। कई जगह सेंटर चलते हैं। संस्था के डायरेक्टर अनीता गौड़ के पति दीपक गौड़ हैं। इन लोगों के पास बच्चों को रखने से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं मिला था।
अनीता राणा से शिकायत करने वाली नूतन का कहना था कि संस्था उसके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, खाना-पीना समेत पूरी तरह देखभाल तो करती ही थी, साथ ही उसे भी पांच हजार रुपये प्रति माह खर्चे के लिए दे रही थी।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बच्चों को पालने के साथ संस्था उनके मां-बाप को क्यों रुपये दे रही है। इसके पीछे आखिर क्या मकसद है। उधर, जिला प्रोबेशन अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह बृहस्पतिवार को सहारनपुर चले गए। इस कारण संस्था के पंजीकरण संबंधी कोई जांच नहीं हो सकी।
देश में चल रही छह संस्थाएं
इमैनुअल सेवा ग्रुप की देश में छह शाखाएं चल रही हैं। मेरठ, दिल्ली, नोएडा, देहरादून, गाेंडा और अलीगढ़ में इसके सेंटर संचालित हैं। इन सेंटर में यूपी, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और बिहार के बच्चे हैं। सूत्रों की मानें तो मेरठ की तरह कहीं पर भी इसे संचालित करने की अनुमति नहीं है।
जनहित फाउंडेशन करेगा काउंसिलिंग
बुधवार शाम आठ बालकों को राजकीय बाल गृह और 11 बालिकाओं को नारी निकेतन भेज दिया गया। चार बच्चों को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। जनहित की निदेशिका अनीता राणा का कहना है कि प्रशासन की ओर से पत्र आते ही इन बच्चों की काउंसिलिंग शुरू कर दी जाएगी।