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बच्चों को बनना था खेलों का मास्टर... कोरोना ने किया लॉक

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बच्चों को बनना था खेलों का मास्टर... कोरोना ने किया लॉक
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मेरठ। बच्चों को आल राउंडर बनाने के लिए छुट्टियों में मम्मियों ने कई सपने देखे थे, लेकिन इस बार सपनों पर कोरोना ने लॉक लगा दिया है। बच्चे को पढ़ाई के साथ डांस, गायन, वादन, खेल, तैराकी में विशेषज्ञ बनाने की मम्मी की चाहत अब अगले साल ही पूरी होगी।
बास्केटबाल सीखने की चाहत
डॉ. रेनू डागर वैशाली कॉलोनी में रहती हैं। वह हर साल छुट्टियों में बेटी को कोई न कोई एक्टिविटी सिखाती हैं, ताकि बच्चे हर चीज को जानें। इस बार भी बेटी आन्या को बास्केटबाल और संगीत सिखाने की योजना थी, लेकिन छुट्टियां शुरू होते ही लॉक डाउन लग गया। पति ही बेटी को पढ़ाते हैं और उसे बैडमिंटन सिखा रहे हैं। शाम को घर पर लॉन या छत में उसकी बैडमिंटन की क्लास होती है। अब अगले साल ही बेटी को बास्केटबाल सिखा पाऊंगी।
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उम्र के साथ सीखने में पिछड़ न जाएं
मीनल मनोहर के दो बेटियां प्रन्या और मसाया हैं। मीनल इस बात से परेशान हैं कि सीखने की उम्र में कहीं बेटियां पिछड़ न जाएं, समय के साथ बच्चे चीजें सीखें। वह कहती हैं दोनों बेटियों को समर ब्रेक में कुछ न कुछ सिखाने का प्लान था। बड़ी बेटी तान्या को तैराकी और बैडमिंटन सिखाने की योजना थी। छोटी बेटी मसाया को किड्स एक्टिविटी सिखानी थी। लेकिन लॉकडाउन की वजह से कुछ नहीं सिखा पाई।
एक अप्रैल से जाना था डांस क्लास
जैन नगर में रहने वाली ऋचा जैन ने अपनी बेटी कियारा का डांस क्लास में एडमिशन करा दिया था। बेटी को शास्त्रीय नृत्य सिखाना था। लेकिन लॉकडाउन की वजह से नहीं सीख पाई। अभी पढ़ाई इतनी ज्यादा नहीं तो बेटी कुछ सीख लेती। जैसे जैसे क्लासें बढ़ेगी वैसे वैसे पढ़ाई का दबाव बढ़ेगा और तब कोई भी एक्टिविटी नहीं सिखा पाऊंगी।
स्पोर्ट्स की जगह कुकिंग की क्लास चल रही
शास्त्रीनगर निवासी विजेता शाह ने अपनी बेटी आरना शाह को इस बार तैराकी और बैडमिंटन सिखाने की तैयारी की थी। स्कूल खत्म होने के बाद उसे अप्रैल में अकादमी ज्वाइन करना था। लेकिन लॉकडाउन लग जाने की वजह से कुछ भी नहीं सिखा पाए। अब घर में ही कुकिंग सिखा रही हीं। ऑनलाइन ड्राइंग और क्लासिकल सिंगिंग भी सीख रही है।
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आउटडोर स्पोर्ट्स के लिए अगले साल तक इंतजार
शास्त्रीनगर में रहने वाली दीपिका पिलानिया ने बेटी काव्या को तैयारी और बेटे अभिराज को डांस सिखाने का प्रोग्राम बनाया था। बेटी आम दिनों में पढ़ाई के कारण कुछ सीखा नहीं पाती। इसलिए सोचा था गर्मी की छुट्टी में इस बार 15 दिन तैराकी सीखाऊंगी। इसके साथ ही बेटे को डांस सिखाना था। क्लास की फीस भी जमा कर दी थी मगर लॉक डाउन होने के कारण कोई क्लासेज नहीं हुई।
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