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आलसी हो गए बच्चे... स्कूल जाने से कर रहे इनकार

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आलसी हो गए बच्चे... स्कूल जाने से कर रहे इनकार
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मेरठ। छात्र-छात्राएं इन दिनों आलसी हो गए हैं। उन्हें देर से सोने और सुबह देर से जगने की आदत पड़ गई है। अब वह स्कूल जाने से कतरा रहे हैं। यह हाल एक या दो बच्चों का नहीं है, बल्कि हर घर का यही माहौल है। बच्चों के व्यवहार से माता-पिता परेशान हैं। शिक्षकों से बच्चों की काउंसिलिंग कराई जा रही है। कुछ अभिभावक बच्चों को चिकित्सकों के पास भी ले जा रहे हैं।
लॉकडाउन के कारण मार्च से बंद चल रहे स्कूलों को पुन: खोलने के लिए सरकार ने आदेश दे दिए हैं। 15 अक्तूबर से सभी बोर्ड के स्कूल खुल सकते हैं। स्कूलों में बच्चे अभिभावकों की इजाजत पर आ सकते हैं। इस निर्णय से स्कूल संचालक और शिक्षक खुश हैं, लेकिन बच्चे उदास हैं। स्कूल खुलने की बात सुनते ही बच्चे तनाव में आ रहे हैं। कई बच्चों ने तो अभिभावकों से साफ कह दिया कि वो स्कूल नहीं जाएंगे। बच्चों का मन अब ऑनलाइन क्लास में भी नहीं लग रहा है।
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केस वन
सोफिया गर्ल्स स्कूल में नवीं कक्षा में पढ़ने वाली वान्या स्कूल जाने की बात सोचकर परेशान है। वह कहती हैं कि स्कूल के लिए अब फिर से सुबह जल्दी उठना होगा। पिछले छह महीने से ऑनलाइन पढ़ाई के कारण देर तक सोने को मिलता था। न जल्दी उठने की चिंता थी और न ही जल्दी तैयार होकर स्कूल भागने की। वान्या अपने मम्मी पापा से बार-बार कहती हैं कि मुझे स्कूल नहीं जाना।
केस टू
दीवान स्कूल में आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले चिराग ने भी जब से दोबारा स्कूल खुलने की बात सुनी है उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा।। उसका कहना है कि अभी मजे से चल रहा था। ऑनलाइन क्लास होती थी, लेकिन अब फिर सर्दियों में सुबह जल्दी उठकर नहाना, जल्दी-जल्दी बस स्टॉप की ओर दौड़ना और स्कूल जाना पड़ेगा।
बहाने बना रहे बच्चे
लॉकडाउन एक तरह से अवकाश अवधि थी। जिसने बच्चों की दिनचर्या को बदला है। हालांकि स्कूलों ने प्रयास किया कि ऑनलाइन क्लास में स्कूल का माहौल दे सकें, मगर यह पूरी तरह संभव नहीं हुआ। इसलिए अब बच्चे आलसी हो गए हैं। स्कूल खुलेंगे तो उनके आराम मेें मुश्किल होगी, इसलिए वो स्कूल जाने से बचने के लिए बहाने खोज रहे हैं।
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- डॉ. पूनम देवदत कहती, सीबीएसई काउंसलर
बदलनी होगी दिनचर्या
बच्चों को दोबारा से उसी दिनचर्या पर लाना होगा। सुबह उठना, तैयार होकर स्कूल जाना। छह महीने के अंतराल में जो छूटा है उसे फिर से उनकी आदत में शामिल करना होगा। इसीलिए अभी से अभिभावक बच्चों को उसी दिनचर्या में ढालना शुरू करें। उसी टाइमटेबल को अपनाएं, ताकि जब स्कूल खुले तो बच्चा घबराए नहीं।
- डॉ. रवि राणा, मनोचिकित्सक
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