मेरठ में सरकारी जमीनों को भू-माफिया और अवैध कब्जों से मुक्त कराना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल रहा। लेकिन जिला प्रशासन ने सीएम के आदेशों को कागजों में दफन कर दिया। योगी सरकार को छह माह हो चुके हैं, मगर शहर में अब तक एक इंच जमीन भी प्रशासन कब्जा मुक्त नहीं करा सका है। एक मामले में भी सिर्फ एमडीए ने अपने हिस्से की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जबकि प्रशासन यहां भी कब्जा लेने में असफल रहा।
शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में सरकारी संपत्तियां मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश पर अवैध कब्जे हैं, तो नगर निगम की संपत्तियां सबसे ज्यादा है। इसके अलावा प्रशासन के प्रबंधन वाली जमीनों को लेकर भी जिला प्रशासन के पास अवैध कब्जे की कई शिकायतें मौजूद हैं। जिनकी जांच में यह पुष्टि भी हो चुकी है कि जमीन सरकारी है और कब्जा अवैध है। लेकिन प्रशासन कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई में फिसड्डी साबित हुआ।
अवैध कब्जेदारों पर दयादृष्टि
हापुड़ अड्डा चौराहा स्थित खसरा नंबर 4632 का मामला ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से उठाया तो यहां बने अवैध कांप्लेक्स को एमडीए ने ध्वस्त कर दिया। लेकिन तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर यहां जमे 93 कब्जेदारों को प्रशासन आज तक नहीं हटा पाया है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के यहां यह मामला पिछले दो माह से सवाल-जवाब में ही अटका है।
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