परतापुर स्थित केमिकल फैक्ट्री में बुधवार को भीषण आग लग गई। इस दौरान वहां रहे साल्वेंट के ड्रम तेज धमाकों के साथ फट गए। दमकल की आधा दर्जन गाड़ियों ने ढाई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग से लाखों का नुकसान हुआ है।
गांव छज्जूपुर स्थित सुधा साल्वेंट केमिकल फैक्ट्री में करीब पौने 11 बजे साल्वेंट पंपिंग के दौरान आग लग लगी। कर्मचारियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन वहां रखे सॉल्वेंट से भरे ड्रम भी आग की चपेट में आ गए। इस कारण आग ने विकराल रूप ले लिया। सूचना पर परतापुर और पुलिस लाइन से फायर ब्रिगेड की छह गाड़ियां मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया। बाद में चीफ फायर ऑफिसर अजय शर्मा, सीओ ब्रह्मपुरी अलिखेश भदौरिया, परतापुर फायर स्टेशन प्रभारी मुकेश कुमार, इंस्पेक्टर परतापुर जीडी त्रिपाठी भी मौके पर पहुंचे। फैक्ट्री अनाधिकृत होने के संदेह पर पुलिस फैक्ट्री मालिक शिरोमणि शर्मा को थाने ले गई।
रिटायर प्रोफेसर की है फैक्ट्री
एसएसआई सतेंद्र यादव फैक्ट्री मालिक शिरोमणि शर्मा डीएन कालेज से रिटायर प्रोफेसर हैं। उन्होंने फैक्ट्री के कागजात पुलिस को दिखाए हैं। उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए कागजात जांच के लिए एडीएम सिटी के यहां भेजे गए हैं। उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया है। कागजातों की जांच के बाद आगे कार्रवाई होगी।
पंप में शार्ट सर्किट से लगी आग
फायर अफसरों ने बताया कि पंप के माध्यम से सॉल्वेंट को ऊपर चढ़ाया जा रहा था। इसी दौरान शार्ट सर्किट से चिंगारी उठी और उससे साल्वेंट में आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग पूरी फैक्ट्री में फैल गई।
मानकों पर चल रही थी फैक्ट्री
हमारी फैक्ट्री के पास लाइसेंस है। सभी मानक पूरे कर फैक्ट्री चलाई जा रही है। आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन हैं। लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि संसाधन कम पड़ गए। आग से नुकसान का सही आकलन तो बाद हो सकेगा, लेकिन लाखों का नुकसान हुआ है।
शिरोमणि शर्मा, फैक्ट्री मालिक
प्रशासन ने औद्योगिक इकाइयों और होटलों में आग से बचाव के मानकों की जांच के लिए टीमें बना दी हैं। जांच भी चल रही है। सभी को चेक किया जाएगा। अनाधिकृत और मानक पूरे किए बिना चल रही फैक्ट्रियों पर कार्रवाई होगी।
अजय शर्मा, चीफ फायर ऑफिसर
आग के मुहाने पर बैठा परतापुर
परतापुर में दर्जनों औद्योगिक इकाईयां हैं। इनमें से कई में ज्वलनशील केमिकल का प्रयोग होता है। नियमानुसार यहां आग से बचाव के र्प्याप्त इंतजाम होने चाहिए। लेकिन यहां मानकों की अनदेखी हो रही है। संबंधित विभाग इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। इस कारण परतापुर की फैक्ट्रियों में लगातार आग की घटनाएं हो रही हैं। फायर स्टेशन प्रभारी मुकेश कुमार के अनुसार सुधा केमिकल फैक्ट्री में दवाईयों का रॉ मैटीरियल बनाया जाता है। पहले 20 ड्रम बताए गए थे, लेकिन बाद में बताया गया कि करीब 80 ड्रम अंदर हैं। प्रति ड्रम 200 लीटर साल्वेंट आता है। अधिकांश ड्रम एक-दूसरे के पास सटे हुए थे। इस वजह से एक के बाद एक आग पकड़ते रहे। इस कारण फायर कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।