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Meerut News: पेयजल की गुणवत्ता जांची, नमूने लेकर टंकी में क्लोरीन डलवाया

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जागृति विहार सेक्टर 4 में पेयजल जका सैंपल लेता नगर निगम के जलकल विभाग की टीम का कर्मचारी.... स
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मेरठ। इंदौर में जहरीले पानी से लोगों की मौत की घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी के बाद मेरठ निगम की नींद खुली है। शनिवार सुबह निगम ने पेयजल की गुणवत्ता जांची, नलकूपों से पानी के नमूने लिए और टंकी में क्लोरीन डलवाया। अपर नगर आयुक्त पंकज कुमार ने बताया कि रोजाना अभियान चलाया जाएगा। सभी टंकी की सफाई कराई जाएगी। क्लोरीन भी नियमित रूप डाला जाएगा। लापरवाही करने वाले कर्मचारी और जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई भी निश्चित होगी।
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गंगनहर स्थित भोले की झाल पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगा है। यहां से महानगर में विकासपुरी, सर्किट हाउस, शर्मा स्मारक, घंटाघर टाउन हॉल पर गंगाजल की आपूर्ति पहुंचती है। करीब पांच लाख की आबादी गंगाजल का प्रयोग करती है। जबकि अन्य आबादी को नगर निगम द्वारा पानी की टंकी, नलकूप और ट्यूबवेल से पेयजल सप्लाई होती है। नगर निगम की लचर व्यवस्था के कारण लोगों को गंदा पानी का पीना पड़ता है। इसकी शिकायतें निगम में पार्षद और स्थानीय लोग लगातार करते हैं। शहर में पानी की पाइप लाइन कई जगहों सीवर लाइन के पास से होकर गुजरती है। पानी की पाइप लाइन लीकेज होने पर दूषित पेयजल लोगों के घरों पहुंचता है। इंदौर की घटना के बाद भी मेरठ निगम की नींद नहीं टूटी थी।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी ने वर्चुअल बैठक के बाद ही निगम अफसर जागे। शनिवार को निगम के जलकल विभाग द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ शहर में 40 नलकूपों पर क्लोरीन की मात्रा की जांच कराई गई। जांच के दौरान औसतन लगभग 0.5 पीपीएम क्लोरीन डोजिंग पाई गई, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप बताई जा रही है। अपर नगर आयुक्त ने बताया कि इस स्तर की क्लोरीन मात्रा पानी में बैक्टीरिया संक्रमण को रोकने के लिए पर्याप्त मानी जाती है। क्लोरीन जांच के साथ-साथ निगम ने 10 नलकूपों से पेयजल के नमूने भी लिए हैं। नमूनों को जांच के लिए गाजियाबाद स्थित मोदीनगर निवाड़ी की लैब में भेजा गया। इसकी रिपोर्ट तीन दिन में आ जाएगी।
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बैक्टीरिया संक्रमण रोकने पर फोकस
नगर निगम ने भी नलकूपों और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से मिलने वाले पानी में किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया संक्रमण को देखते क्लोरीन डलवाया जा रहा है। अपर नगरायुक्त ने बताया कि जलकल विभाग के अधिकारी नियमित रूप से क्लोरिनेशन की मॉनिटरिंग करेंगे। जहां भी कमी पाई जाएगी, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाएगी। नलकूपों पर क्लोरीन की मात्रा की जांच, समय-समय पर पेयजल के नमूने और ट्रीटमेंट प्लांट की मॉनिटरिंग को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा।


वर्षों से उठते रहे हैं सवाल
मेरठ में लंबे समय से गंदे पानी की आपूर्ति, नलकूपों की सफाई न होने और सीवर लाइनों के पास से गुजर रही पेयजल पाइप लाइनों को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई इलाकों में दूषित पानी के कारण बीमारियां फैलने और यहां तक कि मौत के मामले भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद अब तक जल परीक्षण और क्लोरिनेशन की नियमित व्यवस्था नहीं होने पर नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। इसको लेकर अक्सर पार्षद निगम परिसर में हंगामा करते हैं।
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