शहर की ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए जल्द ही महिला कांस्टेबल चौराहों पर खड़ी नजर आएंगी। ट्रैफिक पुलिस में स्टाफ की कमी और चौराहों पर यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के महिला कांस्टेबलों को शामिल करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ट्रैफिक विभाग द्वारा जल्द ही उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर इसकी अनुमति लेने की बात कही जा रही है।
ट्रैफिक पुलिस के लिए शहर की यातायात व्यवस्था बड़ी समस्या बनी है। अधिकांश चौराहे होमगार्ड के हवाले रहते हैं। चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस तैनात होते हुए कई बार महिलाएं भी दोपहिया या चार पहिया वाहनों से नियम तोड़ती नजर आती हैं। ऐसे में ट्रैफिक सिपाही, एचसीपी, टीएसआई और टीआई महिला चालकों को रोकने की जहमत नहीं उठाते। यहां तक कि ट्रैफिक पुलिस एक्टिवा से जाने वाली छात्राओं को रोकने में भी कतराती है। कई छात्राएं बिना हेलमेट के वाहन चलाती हैं, जो उनके लिए खतरनाक हैं। लेकिन ट्रैफिक पुलिस चाहकर भी उन पर कार्रवाई नहीं कर पाती।
महिलाओं द्वारा ट्रैफिक नियम तोड़ते समय कई बार यातायात व्यवस्था बाधित होती है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि जिले में पर्याप्त संख्या में महिला कांस्टेबल हैं। ऐसे में प्रस्ताव बनाकर तैयार किया जा रहा है। उच्च अधिकारी इसका संज्ञान लेंगे तो महिला कांस्टेबलों के आने से ट्रैफिक पुलिस को काफी मदद मिलेगी।
यह है ट्रैफिक पुलिस का तर्क
- ट्रैफिक पुलिस के सामने महिलाओं की चेकिंग करना बड़ी समस्या है। महिलाएं किसी भी वाहन से आ-जा रही हों, ट्रैफिक पुलिसकर्मी उन्हें रोकने से कतराते हैं।
- कई बार अपराधी महिलाओं की आड़ में दोपहिया या चौपहिया वाहन से भागने में कामयाब हो जाते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मी के आने से यह समस्या भी खत्म हो जाएगी।
- कई बार चौराहों पर महिला वाहन चालक ट्रैफिक नियम तोड़ते नजर आती हैं। किसी आरोप से बचने के लिए पुरुष ट्रैफिक कर्मी उनका चालान काटने से बचते हैं।
- महिला पुलिस ही महिला की चेकिंग कर सकती है। चाहे वह किसी भी वाहन में हो।
- पुरुष ट्रैफिक पुलिसकर्मी की अपेक्षा महिला कांस्टेबल गंभीरता से काम करेंगी।
ट्रैफिक पुलिस का ढांचा
ट्रैफिक विभाग में इस समय एसपी ट्रैफिक, सीओ ट्रैफिक, एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर, तीन सब इंस्पेक्टर, सात एचसीपी और 84 कांस्टेबल हैं। चार्ट के अनुसार इनकी ड्यूटी सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे और दोपहर तीन बजे से रात्रि दस बजे तक रहती है। विशेष कार्यक्रम में रात की ड्यूटी के समय में बदलाव भी किया जाता है, लेकिन आठ घंटे से अधिक की ड्यूटी नहीं लगायी जाती।