तत्कालीन वीसी प्रो. एसके काक, तत्कालीन कुलसचिव वीके सिन्हा, तत्कालीन कुलसचिव प्रभात रंजन, तत्कालीन उप कुलसचिव प्रशासन नारायण प्रसाद, तत्कालीन कुलसचिव प्रशासन रामकुमार, तत्कालीन सहायक लेखा अधीक्षक हरवंश लाल, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक अरविंद कुमार, प्रभारी सामान्य एसएस शर्मा, पीए शिव कुमार गुप्ता, वित्त नियंत्रक अतुल कुमार, तत्कालीन प्रवक्ता अर्थशास्त्र प्रो. एनके तनेजा वर्तमान में कुलपति, प्रवक्ता डॉ. शिखा चतुर्वेदी, रुद्राक्ष इंस्टीट्यूट के सचिव अमित गिरि शामिल थे।
उम्रकैद तक हो सकती है सजा
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल बख्शी बताते हैं कि जो धाराएं लगाई गई हैं, उनमें दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। जांच एजेंसी को पहले ऐसे मामलों में शासन से अनुमोदन मिलने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करनी होती थी। उसके बाद गिरफ्तारी होती थी। लेकिन अब शासन से अनुमोदन के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने से पहले गिरफ्तारी होती है। अब देखना ये है शासन क्या अनुमोदन देता हैं।
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