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चातुर्मास में अहं से अर्हम और मानव से माधव बनने का अवसर : साध्वी श्रुत पूर्णा

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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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- भक्तामर आराधना के बाद चातुर्मास स्थापना कार्यक्रम, धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। आदर्श नगर स्थित नूतन श्री चंद्रप्रभु जैन श्वेतांबर मंदिर के शासन सम्राट भवन में साध्वी डॉ. श्रुत पूर्णा श्री एवं साध्वी इष्ट प्रिया की निश्रा में चातुर्मास स्थापना कार्यक्रम उत्साहपूर्वक हुआ। बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं ने धर्मसभा में पहुंचकर साध्वी के प्रवचन सुने और धर्म पालन का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भक्तामर आराधना से हुई। इसके बाद साध्वी डॉ. श्रुत पूर्णा श्री ने चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये चार महीने मनुष्य के लिए अहं से अर्हम, मानव से माधव, समस्या से तपस्या और आत्मा से परमात्मा बनने का अवसर हैं। चातुर्मास के दौरान की जाने वाली आराधना श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि युवाओं की भाषा में चातुर्मास का उद्देश्य पुण्य का ओटीपी प्राप्त करना है। जैन दर्शन का मूल आधार अहिंसा है।
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दैनिक जीवन के प्रत्येक कार्य में अहिंसा और विवेक का पालन करना चाहिए। अपनी दृष्टि को व्यापक रखते हुए प्रत्येक जीव के प्रति करुणा और अहिंसा का भाव रखना जरूरी है। साध्वी ने चातुर्मास में तप, व्रत और अनुष्ठान के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में खान-पान के प्रति विशेष संयम रखना चाहिए। जैन धर्म में चातुर्मास के दौरान तप और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान महावीर ने एकेंद्रीय जीव से लेकर पंचेंद्रीय जीव तक सभी के कल्याण और प्रत्येक जीव के प्रति अहिंसा का भाव रखने का संदेश दिया। उन्होंने भारी बारिश के बावजूद धर्मसभा में पहुंचे श्रद्धालुओं की अनुमोदना की और सभी को चातुर्मास के दौरान गुरुजनों से जिनवाणी श्रवण, स्वाध्याय तथा देव-गुरु-धर्म की सेवा करने का संकल्प दिलाया।
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श्री शांतिनाथ जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक ट्रस्ट के अध्यक्ष आलोक जैन ने बताया कि पर्यूषण पर्व शुरू होने तक साध्वी महाराज साहिब के प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9:15 से 10:30 बजे तक आदर्श नगर जैन उपाश्रय में होंगे। भक्तामर आराधना के पुरस्कार सतेंद्र जैन और आलोक जैन ने वितरित किए। साधर्मी पूजन वीरसेन-उषा जैन परिवार ने किया। कार्यक्रम में रमेश चंद जैन, सतेंद्र जैन, जयप्रकाश जैन, वीरसेन जैन, शिव कुमार जैन, संजय जैन, राहुल जैन, ऋषभ जैन, शिव मंगल मौजूद रहे।
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