मेरठ। तीन लाख राशन कार्डों से लोग गायब हो रहे हैं। किसी परिवार के पांच सदस्यों में तीन तो किसी से चार सदस्य गायब हो गए हैं। राशन कार्ड में हो रहे इस फर्जीवाडे़ को लेकर जनपद में हल्ला मचा है। पीड़ित परिवार आपूर्ति विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। इनके राशन कार्डों में नाम तो शामिल हो रहे हैं, लेकिन कार्ड धारकों को पहले साइबर कैफे पर लुटना पड़ रहा है। एक राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के नाम पर 150 से 200 रुपये वसूली हो रही है।
पूरे प्रदेश में पकड़ा गया था राशन कार्डों का फर्जीवाड़ा
- पूरे प्रदेश में राशन कार्डों का फर्जीवाड़ा पूर्व में पकड़ा जा चुका है। राशन कार्डों में फर्जीवाड़े की शिकायत पूर्व शहर विधायक डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने योगी सरकार बनते ही की थी। जिसपर शासन ने जांच बैठायी थी। जांच में मेरठ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में फर्जी राशन कार्ड का खुलासा हुआ था। जिसमें कई लाख राशन कार्ड निरस्त किए गए थे।
आधार कार्डों को दूसरे शहरों में लिंक करके निकाला गया था राशन
- फर्जी राशन कार्डों के साथ ही जिला आपूर्ति विभाग में एक शहर के परिवारों के आधार को दूसरे शहरों में लिंक करके भी फर्जीवाड़ा किया गया था। पिछले दिनों हुई जांच के दौरान पूरे प्रदेश में ऐसे सैकड़ों परिवार सामने आए थे जिनके आधार कार्ड को दो से तीन राशन एजेंसियों पर भी लिंक किया गया था और उसी आधार पर फर्जी तरह से राशन निकाला जा रहा था। इस राशन घोटाले के आरोप में कई राशन डीलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
फर्जीवाड़े पर सॉफ्टवेयर का वार
- राशन माफियों द्वारा प्रदेश के कोने कोने से लोगों के नाम फर्जी तरह से 2 से तीन राशन एजेंसियों पर जुड़वाए गए थे। जांच के बाद सरकार ने राशन कार्ड और राशन वितरण में फर्जीवाड़े पर सॉफ्टवेयर का पहरा लगा दिया। अब यह सॉफ्टवेयर फर्जी तरह से जुड़े नामों को काट रहा है, जिसके कारण आमजन परेशान हो रहे हैं। कई परिवारों के राशन कार्ड से कई-कई यूनिट गायब हो गई है। अब लोगों को अपने परिवार के सदस्यों के नाम दोबारा राशन कार्ड में जुड़वाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे परिवारों को अब राशन कार्ड से कटी यूनिटों को जुड़वाने के लिए दोबारा से ऑनलाइन आवेदन करना होगा, उसके बाद ही परिवार के सभी सदस्यों के नाम पर राशन मिल पाएगा।
150 से 200 रुपये मेें जुड़ रहे नाम
- राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए कार्ड धारक को साइबर कैफे का सहारा लेना पड़ रहा है। जिसके लिए परिवार से 150 से 200 रुपये तक की वसूली हो रही है। लोगों को कई कई बार साइबर कैफे संचालकों को रुपये देने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं साइबर कैफे पर ऑनलाइन फार्म भरने के बाद एक फोटो काफी जिला पूर्ति विभाग में जमा करनी पड़ती है उसके बाद ही राशन कार्ड में नाम जोड़े जा रहे हैं।
रोज जोड़े जा रहे हैं नाम
सॉफ्टवेयर राशन कार्ड से जो भी नाम काट रहा है। वह वहीं नाम हैं जो एक से अधिक राशन कार्ड में दर्ज हैं। गलत नामों की पूरी तरह सफाई हो रही है। साथ ही ऑनलाइन आवेदन करने वाले परिवारों के नामों को प्रतिदिन राशन कार्ड में जोड़ा जा रहा है। 15 दिन के भीतर सभी राशन कार्ड अपडेट हो जाएंगे। अगले माह से किसी को भी कोई दिक्कत नहीं होगी। - विकास गौतम, जिलापूर्ति अधिकारी।